कमर दर्द : आयुर्वेदिक उपचार
कटि प्रदेश (पीठ का निचला भाग) में होने वाले दर्द को कमर दर्द या कटि शूल कहते हैं. ३० वर्ष की आयु के बाद स्त्रियों के कटिभाग में जो दर्द होता है वह आमतौर पर स्त्री रोग से ही संबंधित होता है.
लक्षण : कमर में बहुत तीव्र वेदना होती है. रोगिणी को कमर सीधी करने में तकलीफ होती है. जमीन से वस्तु उठाते समय बहुत तेज दर्द का आभास होता है. ऐसी अवस्था में अधिकतर स्त्रियां कमर पर हाथ रखकर चलती हैं.
कारण : सामर्थ्य से ज्यादा वजन उठाना, कमर में चोट लगना, काफी देर तक कुर्सी पर एक ही स्थिति में बैठकर काम करना, मोटापा होना, डिस्क खिसकना और रीढ़ की हड्डी के रोग-जैसे हड्डी की टीबी अथवा ऑस्टियो ऑर्थराइटिस होना कटिशूल के आम कारण है. इसके अतिरिक्त स्त्रियों में पाये जाने वाले विशेष विकार भी इसमें शामिल किए जा सकते हैं. ये हैं श्वेत प्रदर (योनि से निकलने वाला सफेद स्राव) कष्ट प्रदर ( मासिक धर्म पीड़ा-युक्त होना ) मासिक धर्म की अनियमतता, पेडू में गर्भाश्य की शोथ, गर्भाश्य में ट्यूमर, प्रसव के बाद की कमजोरी और स्त्रीरोग संबंधित ऑपरेशन के बाद की शारीरिक कमजोरी.
चिकित्सा : कटिल शूल की चिकित्सा में उस कारण का इलाज जरूरी रहता है, जिसकी वजह से इस विकार के जन्म लेने का अंदेशा हो. उस कारण का पर्याप्त इलाज हो जाने पर यह दर्द अपने आप कम हो जाता है, फिर पूरी तरह ठीक भी हो जाता है. आगे विभिन्न कारणों से होने वाले दर्द के उपचार दिये जा रहे हैं.
श्वेत प्रदर से होने वाला कमर दर्द : चन्द्र प्रभा बटी २-२ गोली, त्रिवंग भस्म ६० मि० ग्रा० कुक्टाण्डत्वक ६० मि० ग्रा०, तीनों मिलाकर गर्म दूध से सुबह-शाम लें. अश्वगन्धारिष्ट-४ चम्मच बराबर मात्र में पानी मिलाकर रात्रि में भोजनोपरान्त लें. इसके अलावा गर्म जल में फिटकरी मिलाकर उसमें सिट्जबार्थ (कटिस्नान) लेने से भी श्वेतप्रदरजन्य कमर दर्द यानी कटिशूल ठीक हो जाता है.
कष्टप्रदरजन्य कमर दर्द की चिकित्सा : रजः प्रवर्तनीवटी २-२ गोली सुबह-शाम गर्म पानी के साथ लेने के अलावा दशमूलरिष्ट, कौमार्यासव भी एक-एक चम्मच पानी के बराबर मात्र में मिलाकर दिन में दो बार भोजनोपरान्त लें. इसके साथ ही गर्म पानी से कमर व पेडू की सिंकाई भी करें.
प्रसवोपरान्त होने वाला कमर दर्द : कमर व पेट की मांसपेशियां प्रसव पीड़ा की वजह से शिथिल पड़ जाती हैं. इसकी सहज चिकित्सा के लिए सुपारीपाक-एक-एक बड़ा चम्मच गर्म दूध के साथ सुबह-शाम, सौभाग्य शुष्ठिपाक भी एक-एक चम्मच सुबह-शाम दूध के साथ लें. दोनों औषधियां एक साथ ली जा सकती हैं. इसके अतिरिक्त दशमूलारिष्ट के चार-चार चम्मच समभाग गर्म पानी में मिलाकर सुबह और शाम भोजनोपरान्त लें.
उक्त दवाइयों के अलावा महानारायण तेल की मालिश कमर व पेडू पर करना भी लाभकारी रहता है.
शारीरिक कमजोरी से होने वाला कमर दर्द : इसके लिए दर्द निवारक औषधियों के साथ-साथ जिस्म को बल देने व पुष्ट करने वाले निम्नलिखित योग भी प्रयोग में लाने चाहिए.
अश्वगन्धापाक-१०-१० ग्राम दूध के साथ सुबह-शाम ही गर्म दूध के साथ एक-एक चम्मच किसी भी अच्छी कंपनी का च्यवनप्राश. वृहतवात चिन्तामणि रस की एक गोली दिन में किसी भी वक्त दूध की मलाई के साथ. महानारायण तेल से दर्द वाली जगह पर मालिश करने के अलावा गर्म पानी की बोतल से सेंक करना भी इस विकार के लिए अति उत्तम रहता है.
हड्डी दौर्बल्य के कारण होने वाला दर्द : मुक्ताशक्ति भस्म ५०० मिग्रा. में पर्याप्त मलाई के साथ सुबह-शाम, महायोगराज गुग्गुल की २-२ गोली भी सुबह-शाम गर्म दूध के साथ लेने के अलावा बलारिष्ट नामक तरह औषधि की ३० मिली० खुराक समभाग ताजा जल के साथ सुबह-शाम भोजनोपरान्त लेना अत्यन्त लाभकारी होता है.
अन्य सुझाव : कटि शूल से पीड़ित महिला को हार्ड बैड पर लेट कर आराम करने का नियम बनाते हुए मानसिक चिन्ताओं से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए. साथ ही खाने में हलका व पौष्टिक आहार लेते हुए अधिक वजन उठाने, झुककर अथवा पंजों के बल बैठकर करने वाले कार्यों से बचना चाहिए.
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