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भोपाल की ऐतिहासिक बावड़ी के जीर्णोद्धार कार्य का मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया निरीक्षण,

भोपाल की ऐतिहासिक बावड़ी के जीर्णोद्धार कार्य का मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया निरीक्षण, जल संरक्षण को बताया प्राथमिकता

भोपाल, 27 मई 2025:
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज राजधानी भोपाल के बड़ा बाग स्थित ऐतिहासिक बावड़ी के जीर्णोद्धार कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी प्राचीन बावड़ियों और परंपरागत जल स्रोतों का संरक्षण तथा पुनरुत्थान प्राथमिकता से किया जाए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ संरचनात्मक विकास नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भोपाल की ऐतिहासिक बावड़ी के जीर्णोद्धार कार्य का मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया निरीक्षण,

मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान कहा, “बावड़ियाँ केवल जल संचय की संरचनाएँ नहीं हैं, बल्कि वे हमारे पूर्वजों की दूरदृष्टि, वास्तुशिल्पीय सौंदर्यबोध और प्रकृति के साथ सहअस्तित्व की भावना का प्रतीक हैं। आज जब जल संकट वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है, तब इन पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण करना हमारी जिम्मेदारी बनती है।” उन्होंने यह भी कहा कि इन संरचनाओं के माध्यम से हम भावी पीढ़ियों को जल संरक्षण का सशक्त संदेश दे सकते हैं।

डॉ. यादव ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार जल संरक्षण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत अधिकाधिक जनसहभागिता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन, सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों और युवाओं को इस अभियान से जोड़ने के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँ।

‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के माध्यम से प्रदेश में नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों और अन्य जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य केवल जल संचय नहीं, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखना, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल संकट को दूर करना और सांस्कृतिक विरासत को सहेजना है।

मुख्यमंत्री ने बड़ा बाग की बावड़ी के जीर्णोद्धार कार्यों की सराहना करते हुए इसे एक “आदर्श मॉडल” के रूप में विकसित करने की बात कही, ताकि अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की पहल को प्रेरणा मिले। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कार्यों में स्थानीय इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और जल विशेषज्ञों की सलाह अवश्य ली जाए, जिससे संरक्षण कार्य मूल स्वरूप के अनुरूप हो सके।

निरीक्षण के दौरान भोपाल जिला प्रशासन, नगर निगम और जल संसाधन विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। स्थानीय निवासियों ने मुख्यमंत्री के इस प्रयास की सराहना की और बताया कि वर्षों से उपेक्षित यह बावड़ी अब फिर से जीवनदायिनी बन सकती है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह से अपील की कि वे जल संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और जल स्रोतों की सफाई व देखरेख में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

 

नेशनल कैपिटल टाइम्स ;

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