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इबोला ने बढ़ाई दुनिया की चिंता, कांगो में 118 मौतें; अमेरिकी डॉक्टर भी वायरस की चपेट में

अफ्रीकी देश Democratic Republic of the Congo एक बार फिर खतरनाक इबोला वायरस के प्रकोप से जूझ रहा है। इस बार संक्रमण का कारण इबोला का दुर्लभ बुंडिबुग्यो स्ट्रेन बना है, जिसने अब तक 118 लोगों की जान ले ली है। संक्रमण की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक अमेरिकी डॉक्टर भी इस वायरस से संक्रमित पाया गया है। तेजी से फैलते मामलों के बीच World Health Organization ने इसे वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है।

कांगो के इटुरी और नॉर्थ किवु प्रांत इस समय संक्रमण के सबसे बड़े केंद्र बने हुए हैं। यहां 350 के करीब संदिग्ध मामलों की पहचान की गई है। पड़ोसी देश Uganda में भी संक्रमण पहुंच चुका है और वहां दो मौतों की पुष्टि हो चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में वायरस की सही पहचान नहीं हो पाने के कारण संक्रमण तेजी से फैल गया।

कांगो के प्रसिद्ध वायरोलॉजिस्ट और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायो-मेडिकल रिसर्च के प्रमुख Jean-Jacques Muyembe ने बताया कि बुनिया शहर में संक्रमित पाए गए मरीजों में एक अमेरिकी डॉक्टर भी शामिल है। उन्होंने माना कि शुरुआती जांच के दौरान गलत स्ट्रेन की तलाश की जा रही थी, जिससे कई मामलों में गलत रिपोर्ट सामने आई।

वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञ Matthew M. Kavanagh ने कहा कि यदि समय रहते सही जांच होती तो हालात इतने गंभीर नहीं बनते। उन्होंने अमेरिका द्वारा WHO से अलग होने और विदेशी सहायता में कटौती को भी चिंता का विषय बताया। उनका मानना है कि अफ्रीकी देशों में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है।

कांगो सरकार के अनुसार, इस प्रकोप से पहली मौत अप्रैल के अंतिम सप्ताह में बुनिया में हुई थी। इसके बाद संक्रमित शव को मोंगबवालू ले जाया गया, जहां खनन क्षेत्रों में बड़ी आबादी के कारण वायरस तेजी से फैल गया। अब गोमा, बुटेम्बो और न्याकुंडे जैसे शहर भी संक्रमण की जद में आ चुके हैं।

स्वास्थ्य मंत्री Samuel Roger Kamba ने कहा कि सरकार ने आपात कदम उठाते हुए नए उपचार केंद्र स्थापित करने का फैसला लिया है। WHO की टीमें भी प्रभावित इलाकों में पहुंच चुकी हैं और चिकित्सा सामग्री के साथ निगरानी अभियान चला रही हैं।

आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा प्रभावित 20 से 39 वर्ष आयु वर्ग के लोग हैं। महिलाओं में संक्रमण की दर भी अधिक देखी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण और घनी आबादी वाले इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी चुनौती को और बढ़ा रही है।

बुंडिबुग्यो स्ट्रेन इबोला वायरस का बेहद दुर्लभ रूप है। इसके लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इबोला संक्रमण शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है और इसके लक्षणों में तेज बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त और शरीर से खून बहना शामिल हैं।

स्वास्थ्य एजेंसियों ने लोगों से सतर्क रहने, संक्रमित मरीजों से दूरी बनाए रखने और किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर तुरंत जांच कराने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संक्रमण पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह प्रकोप मध्य अफ्रीका के अन्य देशों के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।

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