पणजी: गोवा के कारापुर गांव में प्रस्तावित मेगा आवासीय परियोजना को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने रविवार को गांव पहुंचकर परियोजना का विरोध किया और इसे पर्यावरण तथा स्थानीय समुदाय के हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में गोवा में आम आदमी पार्टी की सरकार बनती है तो ऐसी विवादित परियोजनाओं की समीक्षा कर उन्हें रद्द किया जा सकता है।
कारापुर गांव में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान केजरीवाल ने ग्रामीणों से मुलाकात की और उनकी चिंताओं को सुना। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और यहां बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य से प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। उनके अनुसार प्रस्तावित परियोजना के तहत लाखों वर्ग मीटर क्षेत्र में हजारों आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जाना है, जिससे इलाके की हरियाली और पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है।
आप प्रमुख ने आरोप लगाया कि इस परियोजना से स्थानीय लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा, जबकि कुछ चुनिंदा लोगों को आर्थिक फायदा पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को अपनी जमीन, जल स्रोतों और पारंपरिक आजीविका को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। ऐसे में सरकार को विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर निर्णय लेना चाहिए।
केजरीवाल ने परियोजना को लेकर पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय स्तर पर परियोजना से जुड़े कुछ लोगों और राजनीतिक प्रभावशाली व्यक्तियों के बीच संबंधों को लेकर चर्चाएं हैं। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ प्रत्यक्ष आरोप लगाने से परहेज किया, लेकिन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भी परियोजना के खिलाफ अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। उनका कहना है कि बड़े पैमाने पर निर्माण से गांव की मूल पहचान और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने सरकार से परियोजना की मंजूरी पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में गोवा की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है। पर्यावरण संरक्षण, भूमि उपयोग और विकास परियोजनाओं को लेकर राज्य में पहले भी कई बार विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में कारापुर मेगा प्रोजेक्ट को लेकर बढ़ता विरोध आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
फिलहाल परियोजना को लेकर बहस जारी है और सभी की नजर सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। ग्रामीणों का आंदोलन जारी रहने की संभावना है, जबकि आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे को मजबूती से उठाने के संकेत दिए हैं।











