नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक गीत लगातार ट्रेंड कर रहा है— “पवन उड़ावे बतिया ओ बतिया…”। इंस्टाग्राम रील्स से लेकर यूट्यूब शॉर्ट्स तक इस गीत की धुन और बोल लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि यह केवल एक फिल्मी गीत नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक खूबसूरत शैली ‘ठुमरी’ से प्रेरित रचना है।
यह गीत वर्ष 2010 में रिलीज हुई सलमान खान अभिनीत फिल्म ‘वीर’ का हिस्सा था। संगीतकार जोड़ी साजिद-वाजिद ने इसे संगीतबद्ध किया था, जबकि गीतकार गुलजार ने इसके बोल लिखे थे। मशहूर गायिका रेखा भारद्वाज की आवाज ने इस गीत को एक अलग पहचान दी।
क्या होती है ठुमरी?
ठुमरी हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की एक लोकप्रिय सेमी-क्लासिकल शैली है। इसमें सुरों की जटिलता से अधिक भावों और अभिव्यक्ति पर जोर दिया जाता है। प्रेम, विरह, मिलन और भावनात्मक अनुभूतियां ठुमरी की प्रमुख विशेषताएं मानी जाती हैं।
ठुमरी में गायक को शब्दों और भावों के साथ खेलने की स्वतंत्रता होती है। यही वजह है कि यह शैली श्रोताओं के दिल तक सीधे पहुंचती है। शास्त्रीय संगीत की तुलना में इसे समझना और महसूस करना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है।
नवाबों के दरबार से शुरू हुआ सफर
संगीत इतिहासकारों के अनुसार, ठुमरी का विकास मुख्य रूप से 18वीं और 19वीं शताब्दी में अवध, विशेषकर लखनऊ और बनारस क्षेत्र में हुआ। नवाब वाजिद अली शाह को ठुमरी के संरक्षण और लोकप्रियता में महत्वपूर्ण योगदान के लिए याद किया जाता है।
उस दौर में ठुमरी केवल संगीत नहीं, बल्कि दरबारी संस्कृति और नृत्य परंपराओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा थी। कथक नृत्य के साथ इसका गहरा संबंध रहा है।
सोशल मीडिया ने दी नई पहचान
समय के साथ ठुमरी की लोकप्रियता सीमित दायरे तक सिमटने लगी, लेकिन डिजिटल युग ने इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम किया। ‘पवन उड़ावे बतिया’ जैसे गीतों ने युवाओं को इस पारंपरिक संगीत शैली से दोबारा जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है।
आज लाखों लोग इस गीत पर रील्स बना रहे हैं, भले ही उन्हें इसकी शास्त्रीय जड़ों की जानकारी न हो। लेकिन यह निश्चित रूप से भारतीय संगीत विरासत को नए श्रोताओं तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है।












