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भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष ऐतिहासिक वियतनाम यात्रा के बाद भारत लौटे

भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष ऐतिहासिक वियतनाम यात्रा के बाद भारत लौटे

भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष ऐतिहासिक वियतनाम यात्रा के बाद भारत लौटे

15 मिलियन श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, 2 जून को दिल्ली पहुंचेंगे अवशेष, 4 जून को सारनाथ में होगी स्थापना

नई दिल्ली,  2025 
भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की ऐतिहासिक यात्रा के बाद वे अब भारत लौटने वाले हैं। यह अवशेष 2 जून 2025, सोमवार को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान द्वारा वियतनाम से दिल्ली लाए जाएंगे। यह यात्रा भारतीय संस्कृति, बौद्ध धर्म और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक अध्याय बन चुकी है।

भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष ऐतिहासिक वियतनाम यात्रा के बाद भारत लौटे
भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष ऐतिहासिक वियतनाम यात्रा के बाद भारत लौटे

ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति के नेतृत्व में भारत सरकार का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इन पवित्र अवशेषों को लेकर दिल्ली पहुंचेगा। दिल्ली के पालम वायुसेना स्टेशन पर अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय बौद्ध भिक्षु और अन्य गणमान्य अतिथि उनका भव्य स्वागत करेंगे।

यह अवशेष-विहार 20 अप्रैल को वियतनाम में शुरू हुआ था और इसे प्रारंभ में 21 मई को समाप्त होना था। लेकिन वियतनाम सरकार के विशेष अनुरोध पर इसकी अवधि को बढ़ाकर 2 जून तक कर दिया गया। इस दौरान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को वियतनाम के नौ प्रमुख शहरों में ले जाया गया, जहाँ कुल मिलाकर 1.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। यह न केवल एक धार्मिक आयोजन था, बल्कि भारत-वियतनाम सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाला एक आयोजन भी साबित हुआ।

3 जून को दिल्ली में स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में अवशेषों को एक दिन के लिए आम जनता के दर्शन हेतु प्रदर्शित किया जाएगा। सुबह से शाम तक संग्रहालय में श्रद्धालु बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर सकेंगे। उसी दिन दोपहर में एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें IBC के महासचिव, वरिष्ठ भिक्षु और विभिन्न देशों के राजनयिक प्रतिनिधि भाग लेंगे।

इसके बाद 4 जून को राष्ट्रपति स्तर की सुरक्षा और सम्मान के साथ ये अवशेष दिल्ली से सारनाथ (वाराणसी के रास्ते) ले जाए जाएंगे। वहां मुलगंध कुटी विहार में इनका विधिवत पूजन और स्थायी रूप से स्थापना की जाएगी। सारनाथ वही स्थान है जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था, और यह स्थान बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष महत्व रखता है।

इस पूरे आयोजन ने न केवल भारत की बौद्ध विरासत को विश्व पटल पर फिर से उजागर किया है, बल्कि शांति, करुणा और मानवता के सार्वभौमिक संदेश को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत किया है। भारत सरकार और संस्कृति मंत्रालय द्वारा इस यात्रा का आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भूमिका को सुदृढ़ करता है।

 

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