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1947 की “कटी-फटी आज़ादी” – कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान

1947 की "कटी-फटी आज़ादी" – कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान

1947 की “कटी-फटी आज़ादी” – कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय का बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में गूंजने लगा है। विजयवर्गीय ने कहा कि भारत को साल 1947 में “कटी-फटी आज़ादी” मिली थी। उनका इशारा साफ तौर पर विभाजन की ओर था, जिसने न सिर्फ देश की सीमाएं बदलीं बल्कि लाखों परिवारों की ज़िंदगी भी तहस-नहस कर दी।

विजयवर्गीय ने कहा कि गलत नीतियों के चलते भारत का विभाजन हुआ और इस दर्द को आज भी देश के करोड़ों लोग महसूस करते हैं। उन्होंने आगे कहा—

“पाकिस्तान की वजह से लाखों परिवार उजड़ गए, लाखों लोग मारे गए। इसलिए मैं इसे अधूरी और कटी-फटी आज़ादी मानता हूं।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि समय बदलेगा और एक दिन इस्लामाबाद में भी तिरंगा लहराएगा।

सोशल मीडिया पर बहस

उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर जबरदस्त बहस छेड़ दी है।

कुछ लोग इसे राष्ट्रवादी भावना से जोड़कर सराह रहे हैं।

वहीं, कुछ लोग इसे राजनीतिक बयानबाज़ी बता रहे हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ

साल 1947 का विभाजन भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास का सबसे दर्दनाक अध्याय माना जाता है।

लगभग 1 करोड़ से ज्यादा लोग विस्थापित हुए।

करीब 10 लाख लोगों की जानें गईं।

लाखों परिवार अपनी जड़ों, घर और पहचान से हमेशा के लिए बिछड़ गए।

यही कारण है कि आज़ादी की खुशी के साथ-साथ विभाजन का घाव भी भारत की सामूहिक स्मृति का हिस्सा बना हुआ है।

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