राधा अष्टमी 2025: महत्व, पूजन विधि, व्रत कथा और बरसाना उत्सव
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी मनाई जाती है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण की अनंत लीला की साक्षी और उनकी ह्लादिनी शक्ति मानी जाने वाली राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जिस प्रकार कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व है, उसी प्रकार राधा अष्टमी भी भक्ति और प्रेम का अद्वितीय पर्व है।
राधा जी का जन्म और पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार राधा रानी का जन्म राजा वृषभानु और रानी कीर्ति के घर बरसाना में हुआ था। उनका बचपन वहीं बीता और यहीं से राधा-कृष्ण की प्रेम कथा की शुरुआत हुई। शास्त्रों में राधा जी को भगवान श्रीकृष्ण की ह्लादिनी शक्ति यानी आनंद और प्रेम का स्वरूप बताया गया है। बिना राधा के कृष्ण की लीला अधूरी मानी जाती है।
राधा अष्टमी का महत्व
1. भक्ति और प्रेम का प्रतीक – यह पर्व सच्चे प्रेम, निस्वार्थ भक्ति और करुणा का संदेश देता है।
2. कृष्ण पूजा का आधार – मान्यता है कि राधा रानी को प्रसन्न करने से भगवान श्रीकृष्ण स्वतः प्रसन्न हो जाते हैं।
3. धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ – इस दिन व्रत-पूजन करने से संतान सुख, अखंड सौभाग्य और पारिवारिक समृद्धि प्राप्त होती है।

राधा अष्टमी की पूजन विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
घर या मंदिर में राधा रानी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
षोडशोपचार विधि से पूजन करें, जिसमें अभिषेक, वस्त्र-आभूषण अर्पण, धूप-दीप, पुष्प, मिष्ठान्न और फल चढ़ाए जाते हैं।
राधा-कृष्ण की झांकियां सजाई जाती हैं और विशेष भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।
दिनभर व्रत रखकर शाम को आरती और संकीर्तन कर व्रत का समापन करें।
राधा अष्टमी व्रत और उसका फल
भक्तजन इस दिन उपवास रखते हैं। यह व्रत संतान सुख, वैवाहिक जीवन की सुख-शांति और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए विशेष रूप से किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और पारिवारिक कलह दूर होता है।

बरसाना और वृंदावन में उत्सव
राधा अष्टमी का पर्व बरसाना, मथुरा और वृंदावन में विशेष धूमधाम से मनाया जाता है।
बरसाना – राधा रानी का जन्मस्थान होने के कारण यहां का उत्सव अत्यंत भव्य होता है। भानुगढ़ पहाड़ी पर स्थित राधा रानी मंदिर में हजारों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।
मथुरा-वृंदावन – मंदिरों में झांकियां सजती हैं, भजन-कीर्तन और संकीर्तन गूंजते हैं।
श्रद्धालु गुलाल और पुष्पों से राधा-कृष्ण का श्रृंगार करते हैं और रातभर भक्तिमय कार्यक्रम चलते हैं।
राधा रानी मंदिर का इतिहास
बरसाना का राधा रानी मंदिर लगभग 5000 वर्ष प्राचीन माना जाता है। इसका निर्माण श्रीकृष्ण के प्रपौत्र राजा वज्रनाभ ने कराया था। समय के साथ यह खंडहर हो गया, लेकिन बाद में चैतन्य महाप्रभु के शिष्य नारायण भट्ट ने इसकी मूर्तियों को पुनः खोजा। इसके बाद 1675 ईस्वी में राजा वीर सिंह देव ने भव्य मंदिर का निर्माण कराया। आज यह मंदिर विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है।

राधा अष्टमी का आध्यात्मिक संदेश
राधा जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा प्रेम त्याग, भक्ति और समर्पण में होता है। राधा और कृष्ण केवल दो व्यक्तित्व नहीं बल्कि प्रेम और भक्ति का अद्वितीय संगम हैं। यही कारण है कि भक्ति साहित्य, विशेषकर भक्तिकालीन कवियों ने राधा-कृष्ण को प्रेम और भक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण बताया है।
राधा अष्टमी केवल देवी राधा के जन्मोत्सव का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रेम, भक्ति और करुणा का उत्सव है। इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा करने से जीवन में आनंद, सौभाग्य और समृद्धि आती है। बरसाना और वृंदावन का भव्य उत्सव भक्तों को आध्यात्मिक आनंद और आत्मिक शांति प्रदान करता है।
पंडित = श्री संदीप द्विवेदी जी
नेशनल कैपिटल टाइम्स












