बागेश्वर धाम पदयात्रा के छठवें दिन उमड़ा आस्था का सैलाब, साध्वी प्रज्ञा बोलीं – “सनातन एकता देखकर जल रहे हैं लोग”
पलवल/बंचारी।
सनातन धर्म की एकता और जागरण का संदेश लेकर निकली बागेश्वर धाम की “सनातन हिंदू एकता पदयात्रा” बुधवार को अपने छठवें दिन पर पहुंची।
धर्म, भक्ति और राष्ट्रप्रेम के संगम जैसी इस यात्रा में हजारों श्रद्धालु सुबह से ही झंडे, जयघोष और नारों के साथ शामिल हुए। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में निकली यह यात्रा हर दिन भव्य रूप लेती जा रही है।
आस्था और परंपरा का संगम
छठवें दिन की यात्रा में देशभर से आए संत-महात्माओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ा दी।
मंच पर दंडी स्वामी, कृष्णानंद महाराज, स्वामी परमेश्वराचार्य, जगतगुरु बलराम देवाचार्य, महंत सत कुमार दास, हरि कृष्णानंद महाराज (अमेरिका), आचार्य मृदुलकांत, आर.के. पांडे, सुनील दास (मान मंदिर) और चमेली वन के महंत घनश्याम वशिष्ठ जैसे प्रतिष्ठित संत विशेष रूप से उपस्थित रहे।
संतों की इस उपस्थिति ने यात्रा को न केवल धार्मिक शक्ति दी, बल्कि सामाजिक एकता और राष्ट्रधर्म के प्रतीक के रूप में भी स्थापित किया।

हनुमान चालीसा और ध्वजारोहण से हुई शुरुआत
जैसा कि प्रतिदिन की परंपरा है, छठवें दिन की यात्रा की शुरुआत हनुमान चालीसा पाठ और ध्वजारोहण से हुई।
इस अवसर पर 85 वर्षीय किशन सिंह, 65 वर्षीय मोहनदास, और संत सिक्का कपित की उपस्थिति में यात्रा का शुभारंभ हुआ।
बागेश्वर धाम सरकार ने 90 वर्षीया शांति देवी को मंच पर सम्मानित करते हुए पट्टिका भेंट की।
वहीं 85 वर्षीय गुलबंदी देवी जब मंच पर पहुंचीं, तो भक्ति भाव में झूम उठीं।
महाराज श्री ने कहा –
“बुजुर्गों का आशीर्वाद ही इस पदयात्रा की सबसे बड़ी पूंजी है। जब तक समाज अपने वृद्धों और संतों का सम्मान करता रहेगा, तब तक धर्म की जड़ें अटूट रहेंगी।”

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कहा – “सनातन एकता देखकर जल रहे हैं लोग”
छठवें दिन की यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण रही भोपाल की सांसद और कट्टर हिंदूवादी नेता साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की मौजूदगी।
वे दोपहर में बंचारी पहुंचीं और हजारों भक्तों की भीड़ के बीच उन्होंने अपने जोशीले अंदाज़ में कहा –

“सनातन हिंदू एकता के इस सैलाब को देखकर कुछ लोग जल रहे हैं। भगवान से मेरी प्रार्थना है कि जो लोग जल रहे हैं, वे पूर्ण रूप से जल जाएं।”
साध्वी ने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को जागृत करने का अभियान है।
उन्होंने कहा
“महाराज श्री की सोच केवल मंदिर या कथा तक सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य देश को ऊंचाइयों तक ले जाना और हर हिंदू के भीतर गर्व की ज्योति जगाना है।”
श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर
पदयात्रा में शामिल श्रद्धालु सुबह से ही ढोल-नगाड़ों और जयघोष के साथ उमड़ पड़े।
हर गली, हर चौक पर “जय श्रीराम”, “जय हनुमान” और “सनातन धर्म की जय” के नारे गूंजते रहे।
महिलाएं और युवा भक्ति में सराबोर होकर महाराज श्री के चरणों में फूल अर्पित कर आशीर्वाद लेते दिखाई दिए।
कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने यात्रा के स्वागत में फूलों की वर्षा की और भोजन प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया।
महाराज श्री का संदेश
दिन के अंत में महाराज श्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा –

“यह पदयात्रा किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष के सनातन प्रेमियों की यात्रा है।
इसका उद्देश्य है – समाज को जोड़ना, धर्म को जगाना और राष्ट्र को सशक्त बनाना।”

नजारा बना अद्भुत
यात्रा का हर पड़ाव एक उत्सव में बदल गया। बंचारी में भक्तों की भीड़ ने जनसागर का रूप ले लिया।
चारों तरफ भगवा पताकाएं लहराईं, मंच पर भक्ति संगीत गूंजता रहा और संतों के प्रवचनों से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
महाराज श्री के दर्शन पाने के लिए लोगों ने घंटों इंतजार किया।












