केंद्रीय पुनर्विकास के तहत बने नए PMO परिसर का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया
केंद्र सरकार ने नई केंद्रीय सचिवालय/Central Vista परियोजना के तहत बने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के नए परिसर का नाम ‘Seva Teerth’ रखने का फैसला किया है। अधिकारियों के मुताबिक इस नामकरण का मकसद प्रशासनिक स्थल को ‘शक्ति’ या शान के बजाय ‘सेवा’ के रूप में प्रस्तुत करना है और यह बदलाव सरकारी कार्यशैली में नागरिक-केंद्रित सोच को दर्शाने का प्रतीक माना जा रहा है।
साथ ही, रिपोर्टों के अनुसार राजभवनों और कुछ अन्य सरकारी आवासों के नामों में भी परिवर्तन किया जा रहा है — उदाहरण के तौर पर राजभवन को ‘लोक भवन’ जैसे विकल्पों से नवाज़ा जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह श्रृंखला एक व्यापक संदेश का हिस्सा है जो ‘सत्ता से सेवा’ की अवधारणा को बल दे।
वहीं विपक्ष ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और कहा कि केवल नाम बदलने से आम जनता की समस्याएँ हल नहीं होंगी। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने कहा कि सरकार का फोकस प्रतीकात्मक बदलावों पर अधिक दिखाई दे रहा है, जबकि रोज़मर्रा के मुद्दे—बेरोज़गारी, महँगाई, स्वास्थ्य और पारदर्शिता—पर असल काम की जरूरत है। कुछ नेताओं ने इसे ‘ताक़त के टैगलाइन’ बदलने जैसा बताया।
विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे नाम-परिवर्तन प्रतीकात्मक रूप से सरकार की प्राथमिकताओं और संदेशों को आकार देते हैं, पर असल प्रभाव तब ही मापा जा सकेगा जब प्रशासनिक व्यवहार और नीतिगत निर्णयों में बदलाव भी दिखे। सार्वजनिक बहस अब इस बात पर केन्द्रित है कि क्या यह केवल नामों का खेल है या इससे शासन-शैली व सेवा-प्रदर्शन पर वास्तविक असर पड़ेगा।












