विकसित भारत शिक्षा बिल 2025: 2 करोड़ जुर्माना और 3 नए रेगुलेटरी काउंसिल
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने विकसित भारत शिक्षा बिल 2025 पेश किया है, जो हायर एजुकेशन सिस्टम में व्यापक सुधार लाने का प्रयास करता है। इस बिल का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना है।
बिल के अंतर्गत तीन नए रेगुलेटरी काउंसिल बनाने की घोषणा की गई है। ये काउंसिल संस्थानों की अकादमिक, प्रशासनिक और वित्तीय गतिविधियों की निगरानी करेंगी। नए काउंसिल के माध्यम से संस्थानों में शिक्षा के मानक और शोध गतिविधियों की निगरानी और आकलन की जाएगी।
बिल के मुताबिक नियमों और निर्देशों का उल्लंघन करने पर विश्वविद्यालयों और कॉलेजों पर 2 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, गंभीर मामलों में संस्थान की मान्यता रद्द करने का प्रावधान भी बिल में शामिल है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस बिल से भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने की संभावना मजबूत होगी। बिल में यह भी कहा गया है कि संस्थानों को छात्र-छात्राओं के हित में डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देना होगा।
केंद्र सरकार का दावा है कि यह बिल हायर एजुकेशन सिस्टम को विकसित बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सहायक होगा। इसके अलावा, शोध एवं नवाचार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और छात्रों को बेहतर करियर विकल्प उपलब्ध होंगे।
बिल अब संसद की स्वीकृति का इंतजार कर रहा है, और पारित होने के बाद यह उच्च शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखता है।












