साइबर ठगों पर एक्शन: आम लोगों को धोखाधड़ी से बचाए गए ₹7,130 करोड़
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच कानून प्रवर्तन एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। साइबर ठगों के खिलाफ चलाए गए व्यापक अभियान के तहत आम लोगों के करीब ₹7,130 करोड़ को धोखाधड़ी का शिकार होने से बचा लिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह राशि उन मामलों से जुड़ी है, जिनमें समय रहते शिकायत दर्ज कराई गई और त्वरित तकनीकी कार्रवाई की गई।
एजेंसियों ने बताया कि डिजिटल ट्रांजैक्शन, ऑनलाइन बैंकिंग और यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ठग फर्जी कॉल, मैसेज, ई-मेल और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को झांसे में लेते हैं। लेकिन हाल के महीनों में साइबर सेल, बैंकिंग नेटवर्क और टेलीकॉम कंपनियों के आपसी समन्वय से ठगी के कई प्रयासों को नाकाम किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन या ठगी की शिकायत मिलती है, संबंधित बैंक खातों को तुरंत फ्रीज किया जाता है। इससे ठगों द्वारा रकम निकालने या आगे ट्रांसफर करने से पहले ही पैसा सुरक्षित हो जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत हजारों मामलों में लोगों की मेहनत की कमाई को बचाया जा सका।
सरकार की ओर से 1930 साइबर हेल्पलाइन और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल को और मजबूत किया गया है। जागरूकता अभियानों के जरिए लोगों को यह बताया जा रहा है कि ठगी की आशंका होने पर तुरंत शिकायत करना कितना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि शिकायत में देरी होने पर रकम वापस मिलना मुश्किल हो जाता है।
अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अनजान कॉल या लिंक पर भरोसा न करें, ओटीपी या बैंक से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।
साइबर ठगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और तकनीकी निगरानी से न सिर्फ अपराधियों पर शिकंजा कस रहा है, बल्कि आम लोगों का डिजिटल लेन-देन पर भरोसा भी मजबूत हो रहा है।












