साथ आने के पीछे क्या है रणनीति, महाराष्ट्र की राजनीति में किसे होगा फायदा?
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अजित पवार और शरद पवार का साथ आना केवल पारिवारिक मेल-मिलाप नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक रणनीति देखी जा रही है। लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक ध्रुवों में खड़े दिख रहे पवार परिवार के दोनों दिग्गजों की नजदीकी ने BJP समेत सभी दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम BJP के लिए एक साफ संदेश है कि महाराष्ट्र में विपक्ष पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है। शरद पवार अब भी राज्य की राजनीति के सबसे बड़े रणनीतिकार माने जाते हैं, जबकि अजित पवार के पास संगठन, सत्ता और प्रशासनिक अनुभव का मजबूत आधार है। दोनों का साथ आना यह संकेत देता है कि भविष्य में बड़े राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं।
अजित पवार के BJP और सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने के बाद यह माना जा रहा था कि शरद पवार का प्रभाव सीमित हो गया है। लेकिन दोनों का एक साथ दिखना इस धारणा को तोड़ता नजर आ रहा है। इससे यह संदेश भी जाता है कि अजित पवार ने सभी राजनीतिक विकल्प पूरी तरह बंद नहीं किए हैं।
BJP के लिए यह स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि आगामी चुनावों में महाराष्ट्र उसकी रणनीति का बड़ा केंद्र रहने वाला है। यदि पवार परिवार की दूरी कम होती है, तो विपक्ष को एकजुट होने का अवसर मिल सकता है। इससे भाजपा की सीट गणित और चुनावी रणनीति पर असर पड़ सकता है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह नजदीकी स्थायी राजनीतिक गठबंधन की ओर इशारा करती है या केवल एक सामरिक मुलाकात है। लेकिन इतना तय है कि अजित और शरद पवार का साथ आना महाराष्ट्र की राजनीति में नए ‘खेल’ की शुरुआत के संकेत जरूर दे रहा है, जिसका असर आने वाले समय में और साफ दिखाई देगा।












