पश्चिम बंगाल में 5 जनवरी को व्यापक बंद का ऐलान किया गया है। यह आह्वान मतुआ समाज की ओर से किया गया है, जो केंद्रीय मंत्री के हालिया बयान से नाराज बताया जा रहा है। बंद के एलान के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है और प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आ गया है।
मतुआ समाज के नेताओं का कहना है कि केंद्रीय मंत्री का बयान उनके समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बयान न सिर्फ सामाजिक सम्मान के खिलाफ है, बल्कि वर्षों से चले आ रहे संघर्ष और पहचान को भी नजरअंदाज करता है। इसी के विरोध में 5 जनवरी को पूरे पश्चिम बंगाल में बंद बुलाया गया है।
समाज के प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया है कि अगर उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। बंद के दौरान बाजार, परिवहन और सरकारी दफ्तरों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। खासकर उत्तर 24 परगना, नदिया और दक्षिण 24 परगना जिलों में बंद का ज्यादा प्रभाव देखने को मिल सकता है, जहां मतुआ समाज की बड़ी आबादी रहती है।
वहीं, राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा इंतजामों की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और आम जनता को परेशानी से बचाने की कोशिश की जाएगी।
राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया है। विपक्ष इसे केंद्र सरकार की नीतियों से जोड़कर देख रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल हालात पर नजर बनाए हुए है। 5 जनवरी को होने वाला यह बंद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।












