‘फोकट के प्रश्न मत पूछो…’ मौतों के सवाल पर कैलाश विजयवर्गीय की टिप्पणी, विवाद के बाद मांगी माफी
गंदे पानी से 10 लोगों की मौत के मामले में सवाल पूछने पर भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय का एक बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। मीडिया से बातचीत के दौरान जब एक पत्रकार ने दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर सरकार की जिम्मेदारी पर सवाल किया, तो विजयवर्गीय ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “फोकट के प्रश्न मत पूछो।” उनका यह बयान कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
इस टिप्पणी के सामने आते ही विपक्ष ने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। कांग्रेस और अन्य दलों ने कहा कि जब आम लोगों की जान जा रही है, तब इस तरह का रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने नेता के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को ऐसे गंभीर मुद्दों पर जवाबदेह और संवेदनशील होना चाहिए।
विवाद बढ़ने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने अपने बयान पर सफाई दी और माफी मांग ली। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी पत्रकार या पीड़ित परिवारों का अपमान करना नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत के दौरान भावावेश में शब्दों का चयन ठीक नहीं रहा, जिसके लिए उन्हें खेद है।
विजयवर्गीय ने आगे कहा कि सरकार गंदे पानी से हुई मौतों को गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया।
यह मामला एक बार फिर जनप्रतिनिधियों की भाषा और आचरण को लेकर बहस को हवा दे गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक जीवन में बैठे लोगों को मीडिया और जनता के सवालों का जवाब संयम और संवेदनशीलता के साथ देना चाहिए, खासकर तब जब मामला जनहानि से जुड़ा हो।












