विदेश नीति पर जयशंकर का बयान—भारत का विकास पड़ोसी देशों की प्रगति से जुड़ा
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बांग्लादेश दौरे के दौरान भारत की विदेश नीति को लेकर अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि भारत का विकास होता है तो उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ोसी देशों पर भी पड़ता है। भारत की प्रगति केवल उसकी अपनी सीमाओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए अवसर और स्थिरता लेकर आती है।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति “पड़ोसी पहले” के सिद्धांत पर आधारित है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना, आपसी विश्वास को मजबूत करना और साझा विकास की संभावनाओं को आगे बढ़ाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि साझेदारी में विश्वास करता है।
बांग्लादेश के साथ संबंधों पर बात करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते बेहद मजबूत हैं। व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत-बांग्लादेश सहयोग इस बात का उदाहरण है कि कैसे दो पड़ोसी देश मिलकर क्षेत्रीय विकास को गति दे सकते हैं।
डॉ. जयशंकर ने यह भी कहा कि वैश्विक अस्थिरता और चुनौतियों के दौर में क्षेत्रीय एकजुटता बेहद जरूरी है। भारत अपने पड़ोसियों के साथ मिलकर आतंकवाद, अवैध गतिविधियों और आर्थिक असमानताओं जैसी समस्याओं से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि स्थिर और समृद्ध पड़ोसी देश भारत के हित में भी हैं।
विदेश मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत बुनियादी ढांचे, डिजिटल सहयोग और मानव संसाधन विकास के जरिए पड़ोसी देशों को आगे बढ़ने में सहयोग करता रहेगा। भारत की यह सोच है कि साझा विकास से ही स्थायी शांति और समृद्धि संभव है।
उनके इस बयान को भारत की संतुलित और सहयोग आधारित विदेश नीति के रूप में देखा जा रहा है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और साझी प्रगति पर केंद्रित है।












