गुजरात: के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर, जिसे द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान प्राप्त है, एक बार फिर राष्ट्रीय चेतना के केंद्र में है। 8 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारत की सभ्यतागत निरंतरता, आस्था और आत्म-सम्मान की सामूहिक अभिव्यक्ति बनकर उभरा है।
यह चार दिवसीय पर्व जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले अभिलिखित आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने के स्मरण के रूप में मनाया जा रहा है। आयोजन का उद्देश्य विनाश की स्मृति को नहीं, बल्कि सहनशीलता, पुनर्निर्माण और अटूट विश्वास की परंपरा को सम्मान देना है। इसी के साथ वर्ष 2026, स्वतंत्र भारत में 11 मई 1951 को पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के पुनः उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने का भी साक्षी बन रहा है।
आस्था, इतिहास और पुनरुद्धार का प्रतीक
अरब सागर के तट पर स्थित सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की जीवंत गाथा है। सदियों तक यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा। इतिहास के विभिन्न दौर में बार-बार आक्रमण झेलने के बावजूद, सोमनाथ का पुनर्निर्माण देवी अहिल्याबाई होल्कर से लेकर सरदार वल्लभभाई पटेल तक, असंख्य भक्तों और राष्ट्रनायकों के संकल्प का परिणाम रहा है।
1947 में सरदार पटेल द्वारा पुनर्निर्माण का संकल्प और 1951 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में मंदिर का पुनः उद्घाटन, स्वतंत्र भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है।
चार दिन, अनेक आयाम
स्वाभिमान पर्व के दौरान सोमनाथ आध्यात्मिक साधना, सांस्कृतिक विमर्श और राष्ट्रीय स्मरण का केंद्र बना हुआ है। आयोजन की प्रमुख विशेषताओं में 72 घंटे का अखंड ओंकार जाप, भक्ति संगीत, आध्यात्मिक संवाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और भव्य ड्रोन शो शामिल हैं।
गिरनार तीर्थ सहित विभिन्न पवित्र स्थलों से संतों की पदयात्रा ने पर्व को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की। डमरू, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और “हर हर महादेव” के जयघोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा।
भव्य मंदिर, जीवंत परंपरा
भगवान शिव के आदि ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रतिष्ठित सोमनाथ मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है। 150 फीट ऊँचा शिखर, 10 टन का कलश, 27 फीट ऊँचा ध्वजदंड और हजारों स्वर्ण-मंडित कलश इसकी भव्यता को रेखांकित करते हैं।
हर वर्ष 90 लाख से अधिक श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए पहुँचते हैं। प्रकाश एवं ध्वनि शो, वंदे सोमनाथ कला महोत्सव जैसे प्रयासों ने मंदिर को आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी स्थापित किया है।
प्रधानमंत्री की सहभागिता से राष्ट्रीय स्वर
8 से 11 जनवरी 2026 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहभागिता ने इस पर्व को राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया है। 10 जनवरी को प्रधानमंत्री ओंकार जाप और ड्रोन शो में शामिल होंगे, जबकि 11 जनवरी को वे शौर्य यात्रा का नेतृत्व करेंगे और मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद जनसभा को संबोधित करेंगे। उनके संबोधन में सोमनाथ के सभ्यतागत महत्व और स्वाभिमान पर्व के संदेश को रेखांकित किए जाने की संभावना है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026 भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास का उत्सव है। यह इतिहास के घावों से ऊपर उठकर आस्था, एकता और स्वाभिमान की विजय का संदेश देता है। सौराष्ट्र के तट पर अडिग खड़ा सोमनाथ मंदिर आज भी यह सिखाता है कि विनाशकारी शक्तियाँ समय में विलीन हो जाती हैं, लेकिन विश्वास और सभ्यता की ज्योति सदैव प्रज्वलित रहती है।












