सत्तरवें जन्मदिन पर बसपा प्रमुख का हमला, प्रतीकों और विचारधारा को लेकर घेरा
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के सत्तरवें जन्मदिन का अवसर केवल शुभकामनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक संदेशों और तीखे हमलों का मंच भी बन गया। इस मौके पर उन्होंने इशारों-इशारों में विरोधी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि आज कई राजनीतिक संगठन उनकी पार्टी की कार्यशैली, नारों और सामाजिक प्रतीकों की नकल कर रहे हैं, लेकिन उनकी नीयत साफ नहीं है।
अपने संबोधन में उन्होंने दोहरे चरित्र की राजनीति पर प्रहार किया। उनका कहना था कि कुछ दल सार्वजनिक मंचों पर धार्मिक और नैतिक मूल्यों की बात करते हैं, जबकि व्यवहार में उनकी नीतियां और फैसले बिल्कुल उलट होते हैं। इस तरह की राजनीति से जनता को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बहुजन आंदोलन किसी अवसरवाद का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष और विचारधारा की देन है।
बसपा प्रमुख ने पार्टी कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि सामाजिक न्याय, समानता और सम्मान की लड़ाई आसान नहीं रही है। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा का उद्देश्य सत्ता भर नहीं, बल्कि उन वर्गों को अधिकार दिलाना रहा है, जिन्हें लंबे समय तक हाशिये पर रखा गया। इसी कारण पार्टी की नीतियां आज भी कई दलों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
जन्मदिन समारोह के दौरान उन्होंने संगठन को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे दिखावे और भावनात्मक नारों से प्रभावित न हों, बल्कि जमीनी सच्चाई और नीतियों को समझकर जनता के बीच जाएं। उनका मानना है कि आने वाले समय में राजनीति में विचारधारा की स्पष्टता सबसे बड़ा हथियार होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान केवल विरोधियों पर हमला नहीं, बल्कि आगामी चुनावी माहौल के लिए संकेत भी है। उनके शब्दों से साफ है कि बसपा अपनी अलग पहचान और मूल एजेंडे को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना चाहती है। सत्तरवें जन्मदिन के मौके पर दिया गया यह संदेश पार्टी कैडर में नया उत्साह भरने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।












