NEET PG 2025‑26 की योग्यता कट‑ऑफ में हाल ही में NBEMS (National Board of Examinations in Medical Sciences) ने बड़े बदलाव किए हैं। इस बदलाव के तहत सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम कट‑ऑफ 7% जबकि आरक्षित श्रेणियों के लिए लगभग 0% तक गिरा दिया गया। इस कदम के खिलाफ डॉक्टरों और वरिष्ठ स्वास्थ्य पेशेवरों ने विरोध जताया है और इसे चिकित्सा शिक्षा और मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है।
इस फैसले के खिलाफ जनहित याचिका (PIL) सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि NEET PG परीक्षा का मूल उद्देश्य योग्य और सक्षम उम्मीदवारों का चयन करना है, ताकि पोस्ट‑ग्रेजुएट प्रशिक्षण और भविष्य में स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। बेहद कम कट‑ऑफ से ऐसे उम्मीदवार भी क्वालीफाई कर सकते हैं जो आवश्यक योग्यता और क्षमता नहीं रखते, जिससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
डॉक्टरों का कहना है कि इस फैसले से मरीजों की सुरक्षा पर भी असर पड़ेगा। यदि न्यूनतम योग्यता स्तर बहुत कम रहेगा, तो डॉक्टरों की प्रशिक्षण गुणवत्ता कमजोर हो सकती है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि NBEMS द्वारा जारी नोटिफिकेशन को रद्द किया जाए और न्यूनतम योग्यता स्तर को सुरक्षित रखा जाए। स्वास्थ्य पेशेवरों का यह भी कहना है कि यदि कट‑ऑफ में बदलाव को चुनौती नहीं दी गई, तो यह भविष्य में मेडिकल शिक्षा की मानक प्रक्रिया और स्वास्थ्य सेवा की विश्वसनीयता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और अदालत तय करेगी कि क्या NBEMS द्वारा किया गया कट‑ऑफ संशोधन चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और सार्वजनिक हित के अनुरूप है या नहीं।












