कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए करीब 13 हजार करोड़ रुपये के नशे के कारोबार पर करारा प्रहार किया है। इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन में गिरोह का मास्टरमाइंड भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। इस कार्रवाई को अब तक की सबसे बड़ी एंटी-ड्रग्स कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क कई देशों में फैला हुआ था और समुद्री व हवाई रास्तों के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर ड्रग्स की सप्लाई की जा रही थी। आरोपी अंतरराष्ट्रीय गिरोह विदेशी तस्करों, स्थानीय सप्लायरों और हवाला नेटवर्क के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी करता था। पकड़ा गया मास्टरमाइंड पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था और कोडवर्ड, एन्क्रिप्टेड ऐप्स व फर्जी कंपनियों के जरिए लेन-देन को अंजाम देता था।
पुलिस ने गुप्त सूचना और तकनीकी निगरानी के आधार पर कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान भारी मात्रा में ड्रग्स, नकदी, मोबाइल फोन, लैपटॉप और बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए गए। शुरुआती जांच में सामने आया है कि नेटवर्क के जरिए युवाओं को निशाना बनाकर नशे की खेप खपाई जा रही थी, जिससे समाज पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था।
अधिकारियों का कहना है कि मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी से पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं। पूछताछ में अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, फंडिंग चैनलों और अन्य सहयोगियों के नाम सामने आने की उम्मीद है। एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुट गई हैं और विदेशों में बैठे तस्करों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि ड्रग्स तस्करी के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। नशे का कारोबार केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे नेटवर्क को खत्म करना युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि नशे से जुड़े किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि इस तरह के अपराधों पर समय रहते रोक लगाई जा सके।












