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संसद में देर से आना पड़ेगा महंगा, गैरहाजिरी मानी जाएगी

Parliament rules

लेट पहुंचने वाले सांसदों की कटेगी सैलरी, अनुपस्थिति दर्ज करने का सख्त नियम

संसद में अब ‘लेट लतीफी’ सांसदों पर भारी पड़ सकती है। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही में समय पर न पहुंचने वाले सांसदों के खिलाफ सख्त नियम लागू करने की तैयारी है। नए प्रावधानों के तहत यदि कोई सांसद तय समय से देरी से सदन में पहुंचता है, तो उसकी उपस्थिति दर्ज नहीं होगी और उसे अनुपस्थित माना जाएगा, जिसका सीधा असर उसकी सैलरी और भत्तों पर पड़ेगा।

सूत्रों के मुताबिक, संसद की कार्यवाही को अधिक अनुशासित और प्रभावी बनाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। अक्सर देखा गया है कि प्रश्नकाल और अन्य महत्वपूर्ण कार्यसूचियों के दौरान कई सांसद समय पर सदन में मौजूद नहीं रहते। इससे न केवल चर्चा प्रभावित होती है, बल्कि जनता के मुद्दे भी पूरी गंभीरता से नहीं उठ पाते।

नए नियमों के अनुसार, सांसदों को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी। यदि वे तय समय सीमा के बाद आते हैं, तो उनकी उस दिन की उपस्थिति दर्ज नहीं की जाएगी और दैनिक भत्ता काट लिया जाएगा। यह व्यवस्था संसद में अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से लाई जा रही है।

संसदीय मामलों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सांसद जनता के प्रतिनिधि होते हैं और उनसे समय की पाबंदी व जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है। समय पर सदन में मौजूद रहना उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। इस नियम से न केवल कार्यवाही की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि सांसदों में अनुशासन की भावना भी मजबूत होगी।

कुछ सांसदों का मानना है कि यह फैसला जरूरी था, क्योंकि इससे संसद की गरिमा बनी रहेगी। वहीं, कुछ का कहना है कि विशेष परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। हालांकि, सरकार का रुख साफ है कि अब देर से आने की आदत पर सख्ती होगी और नियम सभी पर समान रूप से लागू किए जाएंगे।

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