US का जमात पर प्रभाव बढ़ाने का प्रयास, क्षेत्रीय स्थिरता और भारत की सुरक्षा पर संभावित असर
बांग्लादेश में आगामी चुनावों को लेकर अमेरिकी गतिविधियों पर विशेषज्ञों की नजर है। हालिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिका राजनीतिक रूप से प्रभावशाली जमात समूहों को साधने और उन्हें चुनावी माहौल में सक्रिय बनाए रखने में जुटा है। यह कदम न केवल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति को प्रभावित कर सकता है, बल्कि भारत के लिए भी सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से गंभीर संकेत हो सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका का यह प्रयास क्षेत्रीय सियासी समीकरण बदलने के मकसद से किया जा रहा है। जमात जैसे संगठन पाकिस्तान और अन्य कट्टरपंथी समूहों के संपर्क में रह चुके हैं। यदि इनकी गतिविधियों को चुनावी माहौल में बढ़ावा मिलता है, तो यह भारत के पूर्वी सीमाओं के पास अस्थिरता बढ़ा सकता है। खासकर भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध गतिविधियों और कट्टरपंथी नेटवर्क के फैलने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भारत के लिए यह स्थिति कई तरह की चुनौती पेश कर सकती है। सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और अवैध आर्थिक और हथियारों की आपूर्ति पर निगरानी को और कड़ा करना होगा। इसके अलावा, भारत-बांग्लादेश रणनीतिक साझेदारी पर भी दबाव बढ़ सकता है, यदि चुनावी प्रक्रिया में कट्टरपंथी प्रभाव बढ़ता है।
विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि भारत को न केवल अपनी सीमा सुरक्षा को मजबूत करना होगा, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर बांग्लादेश के लोकतांत्रिक संस्थानों के साथ संवाद बढ़ाना जरूरी है। अमेरिका की सक्रियता को समझना और उसके संभावित प्रभाव का आकलन करना भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित होगा।
बांग्लादेश चुनाव और इसके आसपास की राजनीतिक सक्रियता पर नजर रखना इसलिए जरूरी है, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे और भारत की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।












