सरकार कर सकती है अलग प्रोटोकॉल तय, सार्वजनिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर स्पष्ट नियमों पर मंथन
देश में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को लेकर पहले से तय प्रोटोकॉल मौजूद है, जिसमें इसके गायन, समय, मुद्रा और सम्मान से जुड़े स्पष्ट नियम निर्धारित हैं। अब इसी तरह ‘वंदे मातरम्’ के लिए भी औपचारिक दिशा-निर्देश तय किए जाने की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर सकती है, ताकि राष्ट्रगीत के सम्मान और उपयोग को लेकर किसी तरह का भ्रम न रहे।
‘वंदे मातरम्’ का ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा रहा है। यह गीत आज़ादी की लड़ाई में राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बना और वर्षों से विभिन्न सरकारी, सामाजिक और शैक्षणिक आयोजनों में गाया जाता रहा है। हालांकि, अलग-अलग मंचों पर इसके गायन के तरीके और अवसर को लेकर एकरूपता की कमी देखी जाती है। ऐसे में नया प्रोटोकॉल इस अंतर को खत्म करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
संभावित नियमों में यह तय किया जा सकता है कि किन सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य होगा, इसे किस मुद्रा में सुना या गाया जाएगा और किन परिस्थितियों में इसके संक्षिप्त या पूर्ण संस्करण का उपयोग किया जा सकेगा। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जा सकता है कि इस गीत के सम्मान में खड़े होने या अन्य आचरण को लेकर क्या अपेक्षाएं होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट दिशानिर्देश बनने से अनावश्यक विवादों में कमी आएगी और राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर एक समान समझ विकसित होगी। हालांकि, कुछ वर्गों का यह भी कहना है कि किसी भी नए नियम को बनाते समय सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
अगर सरकार इस दिशा में कदम उठाती है, तो यह न केवल ‘वंदे मातरम्’ के प्रति सम्मान को संस्थागत रूप देगा, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर अनुशासन और स्पष्टता भी सुनिश्चित करेगा।












