दिल्ली में PUC (Pollution Under Control) सर्टिफिकेशन सिस्टम को लेकर इंडिया टुडे की जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का खुलासा होने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। खुलासे में कहा गया कि कुछ PUC सेंटर बिना गाड़ी की वजह जांच किए फर्जी सर्टिफिकेट जारी कर रहे हैं, जिससे प्रदूषण नियंत्रण सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्ट में इस तरह के “स्टिंग” संचालन का हवाला देते हुए सिस्टम की खामियों को उजागर किया गया।
AAP नेताओं ने इस खुलासे का समर्थन करते हुए केंद्र और दिल्ली सरकारों पर निशाना साधा है। पार्टी ने कहा कि यह सिर्फ सिस्टम की लौकिक खामी नहीं, बल्कि डेटा में गड़बड़ियों और संस्थागत विफलता को उजागर करता है। AAP के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि PUC सिस्टम में “सिस्टमैटिक हेरफेर” हो रहा है और यह सिर्फ एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण की प्रक्रिया के हर स्तर पर यह समस्या देखने को मिल रही है। उन्होंने इस मुद्दे को “फर्जीवाड़े की सरकार का प्रतिनिधित्व” बताया और कहा कि जनता को भ्रमित करने के प्रयास हो रहे हैं।
दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने AAP के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि PUC प्रणाली और उसके नियमन को सख्ती से लागू किया जा रहा है। सरकार ने गलत गतिविधियों में लिप्त PUC सेंटरों के लाइसेंस रद्द करने, कई सेंटरों के संचालन पर कार्रवाई करने और नए मानकों के तहत अतिरिक्त निगरानी बढ़ाने की बात कही है। पर्यावरण मंत्री ने यह भी कहा कि “नो PUC, नो फ्यूल” नीति जारी रहेगी और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाएगी।
यह विवाद राजधानी में बढ़ती वायु प्रदूषण समस्या के बीच उभर रहा है, जहां PUC सर्टिफिकेट प्रणाली को कार्बन उत्सर्जन नियंत्रण और हेल्थ सेफ़्टी का अहम हिस्सा माना जाता है। अधिकारियों ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जनता को बेहतर वायु गुणवत्ता सुनिश्चित करने का प्रयास पूरी तरह जारी है।












