बार काउंसिल ने नियमों में किया बदलाव, अंतिम वर्ष के छात्र सीधे परीक्षा में बैठ सकेंगे
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। अब अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE) साल में दो बार आयोजित होगी, जिससे लॉ ग्रेजुएट्स को वकालत की योग्यता प्राप्त करने में ज्यादा अवसर मिलेंगे। इससे पहले यह परीक्षा साल में केवल एक बार होती थी, जिसके कारण कई छात्रों को पंजीकरण में विलंब का सामना करना पड़ता था।
सबसे बड़ी राहत यह है कि अंतिम वर्ष (फाइनल ईयर) के छात्र भी परीक्षा में बैठ सकेंगे, बशर्ते वे अपनी यूनिवर्सिटी परीक्षा पूरी कर चुके हों। इससे छात्र लॉ की पढ़ाई पूरी होते ही Bar के लिए क्वालिफाई कर पाएंगे और जल्द ही कोर्ट में वकील के रूप में पंजीकरण करवा सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही BCI को निर्देश दिया था कि AIBE के नियमों में बदलाव कर अंतिम वर्ष के छात्रों को शामिल किया जाए। इस कदम से छात्रों का एक साल खराब होने का डर समाप्त हो जाएगा। अब 2026 से लागू होने वाले नियमों के तहत, परीक्षा के दोनों सत्रों में अंतिम वर्ष के छात्र भाग ले सकेंगे।
AIBE एक क्वालिफाइंग टेस्ट है, जिसे पास करने के बाद ही लॉ ग्रेजुएट्स को भारत में कोर्ट में वकील बनने का अधिकार मिलता है। परीक्षा पूरे देश में ऑफलाइन मोड में आयोजित होती है और इसमें लॉ के विभिन्न विषयों की समझ परखने वाले प्रश्न पूछे जाते हैं।
बार काउंसिल ने यह भी स्पष्ट किया है कि फाइनल ईयर के छात्रों को तभी परीक्षा में बैठने की अनुमति मिलेगी जब वे अपने पूरे कोर्स में सफल होंगे। पहला सत्र संभवतः जून 2026 में आयोजित किया जाएगा और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया फरवरी–अप्रैल 2026 के बीच जारी रहेगी।
इस बदलाव से लॉ छात्रों को शिक्षा और पेशेवर जीवन में काफी सुविधा मिलेगी। साल में दो बार होने वाली परीक्षा से उन्हें बार काउंसिल के पंजीकरण में देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा और युवा वकीलों के लिए अवसरों का विस्तार होगा।












