अयोध्या से ऐतिहासिक खबर: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण पूर्ण, भव्य दर्शन की पूरी तैयारी!
अयोध्या नगरी एक बार फिर दिव्यता और भक्ति के चरम पर पहुंच गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है।
यह वही क्षण है जिसका वर्षों से करोड़ों रामभक्त बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे।
मुख्य मंदिर और परकोटा के छह मंदिर पूर्ण
ट्रस्ट के अनुसार, मुख्य श्रीराम मंदिर के साथ परकोटा में स्थित छह देवालयों –
भगवान शिव, भगवान गणेश, भगवान हनुमान, सूर्यदेव, देवी भगवती, देवी अन्नपूर्णा और शेषावतार मंदिर – का निर्माण कार्य भी पूर्ण हो चुका है।
सभी मंदिरों पर ध्वजदंड और कलश की स्थापना विधिवत रूप से संपन्न कर दी गई है, जिससे पूरे परिसर में आध्यात्मिक आभा और पवित्रता का वातावरण व्याप्त है।
सप्त मंडप और संतों के मंदिर भी तैयार
अयोध्या धाम में निर्मित सप्त मंडप – जिनमें महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, शबरी और ऋषिपत्नी अहल्या के मंदिर शामिल हैं – अब पूर्ण रूप से बनकर तैयार हैं।
इसके साथ ही संत गोस्वामी तुलसीदास मंदिर भी बन चुका है, जो रामचरितमानस की स्मृति और श्रीराम भक्ति का अमर प्रतीक है।
इसके अतिरिक्त जटायु और गिलहरी की प्रतिमाएं भी स्थापित कर दी गई हैं, जो सेवा, त्याग और निष्ठा के प्रतीक के रूप में श्रद्धालुओं को भावविभोर कर रही हैं।
दर्शनार्थियों की सुविधा हेतु सभी कार्य पूरे
तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बताया कि जिन सभी कार्यों का सीधा संबंध दर्शनार्थियों की सुविधा और मंदिर प्रबंधन से है, वे पूरी तरह पूर्णत्व को प्राप्त कर चुके हैं।
सड़क निर्माण और पत्थर फ्लोरिंग का कार्य पूरा किया गया है।
10 एकड़ क्षेत्र में पंचवटी परिसर का सौंदर्यीकरण, हरियाली और लैंडस्केपिंग का कार्य तेज़ गति से जारी है।
कुछ आंतरिक कार्य अभी जारी
ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल वे कार्य शेष हैं जिनका संबंध सीधे श्रद्धालुओं से नहीं है, जैसे –
3.5 किलोमीटर लंबी चारदीवारी, ट्रस्ट कार्यालय, अतिथि गृह और सभागार का निर्माण कार्य।
ये कार्य भी अगले चरण में पूर्ण कर लिए जाएंगे।
अयोध्या बनी राममय, श्रद्धा का सागर उमड़ा
अयोध्या नगरी इस समय भक्ति और आनंद से सराबोर है। मंदिर परिसर में सुगंधित पुष्पों, दीपों और कलशों से सजी सजावट चारों ओर दिव्यता फैला रही है।
देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अब श्रीरामलला के भव्य दर्शन के लिए पहुंचने को आतुर हैं।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का यह ऐतिहासिक पूर्णत्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, एकता और समर्पण की अमर गाथा भी है।
नेशनल कैपिटल टाइम्स












