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बांग्लादेश की सत्ता की जंग और भारत की चिंता, बदलते समीकरण

Bangladesh Politics, BNP vs Jamaat

BNP बनाम जमात की राजनीति में भारत की भूमिका अहम;

तारिक रहमान की वापसी से बदलेगा सत्ता संतुलन?

बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के बीच बढ़ती राजनीतिक सक्रियता ने न केवल देश की आंतरिक राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि भारत के लिए भी नई रणनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इस पूरे घटनाक्रम में BNP के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान की संभावित वतन वापसी को बेहद अहम माना जा रहा है।

BNP को अपेक्षाकृत मध्यमार्गी और भारत के प्रति व्यवहारिक दृष्टिकोण रखने वाली पार्टी माना जाता है, जबकि जमात-ए-इस्लामी का झुकाव कट्टरपंथी राजनीति की ओर रहा है। भारत के नजरिए से देखा जाए तो बांग्लादेश में ऐसी सरकार का बनना जरूरी है, जो सीमा सुरक्षा, आतंकवाद, अवैध घुसपैठ और व्यापार जैसे मुद्दों पर सहयोगी रुख अपनाए। ऐसे में BNP की सरकार को भारत के लिए अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

तारिक रहमान की वापसी से BNP को नई ऊर्जा मिल सकती है। लंबे समय से विदेश में रह रहे तारिक रहमान को पार्टी का प्रमुख रणनीतिक चेहरा माना जाता है। उनकी वापसी से पार्टी संगठन मजबूत हो सकता है और चुनावी राजनीति में नई धार देखने को मिल सकती है। हालांकि, उन पर भ्रष्टाचार और विवादों के पुराने आरोप भी रहे हैं, जो उनके राजनीतिक भविष्य को जटिल बनाते हैं।

जमात-ए-इस्लामी की भूमिका को लेकर भारत सतर्क रहा है। अतीत में इस संगठन पर कट्टरपंथ को बढ़ावा देने और भारत विरोधी गतिविधियों के आरोप लगते रहे हैं। यदि जमात का प्रभाव सरकार में बढ़ता है, तो भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश की अगली सरकार दक्षिण एशिया की राजनीति को प्रभावित करेगी। भारत की प्राथमिकता यही होगी कि ढाका में स्थिर, लोकतांत्रिक और सहयोगी सरकार बने, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को मजबूती मिल सके।

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Rudra ji