नोएडा में एक इंजीनियर की संदिग्ध हालात में मौत के मामले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। पुलिस ने जांच के दायरे को और विस्तृत करते हुए दो और बिल्डरों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले भी इस मामले में कुछ आरोपियों पर कार्रवाई हो चुकी है। पुलिस का कहना है कि मृतक इंजीनियर को लंबे समय से मानसिक दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा था, जिसकी कड़ियां बिल्डरों और अवैध निर्माण गतिविधियों से जुड़ती दिख रही हैं।
जांच में सामने आया है कि जिस इलाके में घटना हुई, वहां नियमों के विपरीत निर्माण और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी की गई थी। इसी कड़ी में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। NGT ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित विभागों के पांच अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। नोटिस में पूछा गया है कि अवैध निर्माण, जलभराव, ड्रेनेज और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को समय रहते क्यों नहीं रोका गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों बिल्डरों से पूछताछ में अहम जानकारियां मिली हैं। इनके कॉल रिकॉर्ड, लेन-देन और परियोजनाओं की फाइलें खंगाली जा रही हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि इंजीनियर पर नियमों को नजरअंदाज करने या अवैध कामों को मंजूरी देने का दबाव बनाया जा रहा था। विरोध करने पर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जो अंततः उसकी मौत का कारण बना।
NGT ने साफ कहा है कि अगर अधिकारियों की लापरवाही साबित होती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, संबंधित बिल्डर प्रोजेक्ट्स की पर्यावरणीय मंजूरियों और निर्माण अनुमति की दोबारा समीक्षा के आदेश दिए गए हैं।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर नोएडा और NCR क्षेत्र में बिल्डर-अफसर गठजोड़, अवैध निर्माण और सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक इंजीनियर के परिवार ने दोषियों को कड़ी सजा और सिस्टम में सुधार की मांग की है।












