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सड़क पर दौड़ती मौत: भारत में बसों में आग की बढ़ती घटनाएं, यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल

Short Circuit Fire

चलती बस बनी आग का गोला, लापरवाही और तकनीकी खामियां बढ़ा रहीं खतरा

हाल के महीनों में देशभर से बसों में आग लगने की कई भयावह घटनाएं सामने आई हैं। कहीं चलती बस में अचानक आग भड़क उठी, तो कहीं यात्रियों को जान बचाने के लिए कूदना पड़ा। इन घटनाओं ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या भारत की सड़कों पर दौड़ने वाली बसें अब यात्रियों के लिए सुरक्षित नहीं रहीं?

विशेषज्ञों के मुताबिक बसों में आग लगने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण है वाहनों का खराब रखरखाव। पुरानी और जर्जर बसों में समय पर वायरिंग, इंजन और फ्यूल सिस्टम की जांच नहीं होती। शॉर्ट सर्किट, ओवरहीटिंग और फ्यूल लीकेज से आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

इसके अलावा CNG और डीजल बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी बड़ा कारण है। कई बार सिलेंडर, पाइपलाइन और वाल्व की नियमित जांच नहीं की जाती। निजी बस ऑपरेटर लागत बचाने के लिए मेंटेनेंस पर समझौता कर लेते हैं, जिसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है।

एक और गंभीर पहलू है आपातकालीन व्यवस्था की कमी। कई बसों में फायर एक्सटिंग्विशर या तो होते ही नहीं या खराब हालत में होते हैं। आपातकालीन दरवाजे जाम रहते हैं और ड्राइवर-कंडक्टर को आग लगने की स्थिति में जरूरी ट्रेनिंग भी नहीं मिली होती।

सरकारी एजेंसियों का कहना है कि बसों की फिटनेस जांच के नियम मौजूद हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका सख्ती से पालन नहीं हो रहा। सड़क परिवहन विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक नियमित ऑडिट, सख्त निरीक्षण और दोषी ऑपरेटरों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकना मुश्किल है।

यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि बसों में आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम, GPS-आधारित मॉनिटरिंग और समयबद्ध मेंटेनेंस अनिवार्य किया जाए। साथ ही यात्रियों को भी सतर्क रहकर ओवरलोडिंग और जर्जर बसों में सफर करने से बचना चाहिए।

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