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१५ घंटे की मेहनत के बाद सिर्फ ₹763 कमाई —

Delivery Boy, Himanshu

नई दिल्ली/दिल्ली: राजधानी में डिलीवरी वर्कर्स की चुनौतियों पर फिर से बहस छिड़ गई है। एक डिलीवरी बॉय हिमांशु का मामला तब सवालों में आया जब उसने बताया कि 15 घंटे की लगातार ड्यूटी के बाद उसकी कुल कमाई मात्र ₹763 ही रही। यह खबर संसद तक पहुँची और विधायकों ने प्लेटफॉर्म इकॉनमी, न्यूनतम भुगतान और काम के घंटे नियंत्रित करने की मांग उठाई।

हिमांशु ने आजतक को बताया कि सुबह सात बजे घर से निकलकर रात करीब बारह बजे तक उसने लगातार ऑर्डर डिलीवर किए। रास्ते में पेट्रोल, समय और बीमार माता-पिता का इलाज—सब कुछ उसके सिर पर है, पर कमाई इतनी कम कि घर चलाना मुश्किल हो गया है। उसने कहा, “कभी-कभी प्लेटफॉर्म पर घंटों रुक कर ऑर्डर की उम्मीद लगानी पड़ती है, पर कमिशन और कटौती के बाद जेब में कुछ नहीं बचता।”

कर्मचारी संगठनों ने कहा कि यह कोई अकेला मामला नहीं है; वे मानते हैं कि गिग-इकॉनमी में मेहनत और पारिश्रमिक में असंतुलन बढ़ता जा रहा है। यूनियनों की मांग है—न्यूनतम गारंटीड पे, पारदर्शी पे-स्कीम और सुरक्षित वर्किंग घंटे। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि प्लेटफॉर्म्स को पारिश्रमिक मॉडल सुधारना होगा—फिक्स्ड बेस + दूरी/टाइम एलाउंस व सुविधाएँ जैसे बीमा और मेडिकल कवरेज देना चाहिए।

किसी सरकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि मामले की जांच कराकर जल्द नीति पर काम किया जाएगा। कुछ प्लेटफॉर्म्स ने कहा कि असल कमाई में अक्सर बोनस व इंसेंटिव होते हैं, पर कर्मचारियों ने इनका भरोसा कम बताया।

मामले ने सोशल मीडिया पर भी तेज प्रतिक्रियाएँ जगाईं और आम लोगों से अपील बढ़ी कि वे वर्कर्स के प्रति संवेदनशील हों। हिमांशु जैसे कई वर्कर्स के हक में ठोस कदम उठाने की मांग तेज हुई है—चाहे वह रेगुलेशन हो, न्यूनतम पे का कानून या प्लेटफॉर्म-वर्कर्स के लिए सोशल सुरक्षा नेटवर्क।

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