हरियाणा में नगर निगम चुनावों के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक गैंगस्टर ने जेल में बंद होने के बावजूद अपने नामांकन पर्चा जमा किया। जेल अधिकारियों और पुलिस सुरक्षा के बीच आरोपी हाथ बंधे और मुख पर काला कपड़ा लगाए चुनाव कार्यालय पहुंचा।
घटना के दौरान उसने विक्ट्री साइन भी बनाते हुए अपना विश्वास दिखाया कि वह चुनाव में मैदान में है। नामांकन पर्चा भरने की इस घटना ने चुनाव प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय अधिकारीयों के अनुसार, आरोपी जेल से बाहर नहीं निकला, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के तहत उसे विशेष वाहन और पुलिस काफिला प्रदान किया गया। जेल प्रशासन ने बताया कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब कोई कैदी चुनाव प्रक्रिया में शामिल हुआ हो, लेकिन यह मामला मीडिया और जनता का ध्यान आकर्षित करने वाला है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं कानून और लोकतंत्र के बीच संतुलन की आवश्यकता को दिखाती हैं। जबकि किसी भी आरोपी का नामांकन कानूनी रूप से संभव है, सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
चुनाव आयोग ने इस घटना पर नजर रखते हुए कहा कि सभी सुरक्षा नियमों का पालन किया गया और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सख्त व्यवस्था की गई। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि जेल से आने वाले किसी भी उम्मीदवार के कारण आम जनता और अन्य उम्मीदवारों को कोई खतरा न हो।
इस घटना ने यह साबित किया कि जेल से बाहर न होने के बावजूद भी अपराधी राजनीतिक क्षेत्र में अपनी छवि बनाने के प्रयास कर सकते हैं। प्रशासन ने इसे नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं।












