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साफ हवा नहीं तो एयर प्यूरीफायर पर टैक्स क्यों? दिल्ली हाईकोर्ट का सरकार से सवाल

Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछा– जब प्रदूषण से राहत जरूरी, तो एयर प्यूरीफायर पर टैक्स क्यों; गडकरी बोले– 40% प्रदूषण ट्रांसपोर्ट सेक्टर से

दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बार फिर सरकार से तीखे सवाल किए हैं। कोर्ट ने कहा कि जब वायु प्रदूषण आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है, तब एयर प्यूरीफायर जैसे उपकरणों को “लक्जरी आइटम” मानकर उन पर टैक्स लगाना कितना उचित है? अदालत ने साफ कहा कि लोगों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी है और ऐसे में राहत देने वाले साधनों पर कर लगाना विरोधाभासी प्रतीत होता है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी उस समय आई जब राजधानी में AQI खतरनाक स्तर पर बना हुआ है और बुजुर्गों, बच्चों तथा सांस के मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोर्ट ने सरकार से यह भी जानना चाहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक और ठोस रणनीति कब लागू की जाएगी, ताकि नागरिकों को अस्थायी उपायों पर निर्भर न रहना पड़े।

इसी बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने प्रदूषण के स्रोतों पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि देश में लगभग 40% वायु प्रदूषण ट्रांसपोर्ट सेक्टर से फैलता है। गडकरी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल वाहनों से निकलने वाला धुआं, पुराने वाहनों की संख्या और ट्रैफिक जाम इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं।

उन्होंने बताया कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों, वैकल्पिक ईंधन (जैसे इथेनॉल, हाइड्रोजन और CNG) और बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देकर प्रदूषण कम करने की दिशा में काम कर रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सख्त नीतियां और उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होगा, तब तक हालात में बड़ा सुधार मुश्किल है।

दिल्ली हाईकोर्ट की यह टिप्पणी एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि प्रदूषण से जूझ रहे नागरिकों को राहत देने के लिए सरकार को कर नीति और पर्यावरण नीति में संतुलन बनाना होगा।

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