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Karnataka Politics: कैबिनेट गठन पर तेज हुई कवायद, दिल्ली में हाईकमान संग मंथन करेंगे शिवकुमार और सिद्धारमैया

बेंगलुरु/नई दिल्ली: कर्नाटक में नई कांग्रेस सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री पद के लिए चुने गए डी.के. शिवकुमार और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया सोमवार को दिल्ली पहुंचकर पार्टी हाईकमान से मुलाकात करेंगे। इस दौरान मंत्रिमंडल गठन, विभागों के बंटवारे, उपमुख्यमंत्री पदों और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है।

डी.के. शिवकुमार को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया, जिसके बाद उन्हें नई सरकार बनाने का न्योता दिया गया। अब 3 जून को बेंगलुरु में भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा, जहां शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

हालांकि सरकार गठन से पहले सबसे बड़ी चुनौती मंत्रिमंडल के स्वरूप को अंतिम रूप देना है। कांग्रेस नेतृत्व यह तय करने में जुटा है कि पहले चरण में कितने मंत्रियों को शपथ दिलाई जाए और किन नेताओं को सरकार में शामिल किया जाए। सूत्रों के अनुसार पार्टी हाईकमान सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सूची तैयार कर रहा है।

मंत्री पदों को लेकर कई वरिष्ठ नेताओं की दावेदारी सामने आ रही है। पूर्व मंत्री एम.बी. पाटिल, दिनेश गुंडू राव, मधु बंगारप्पा समेत कई नेता सक्रिय रूप से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। वहीं विभिन्न जिलों और समुदायों के नेता भी अपने-अपने क्षेत्र को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने की मांग कर रहे हैं। खास तौर पर लिंगायत, वोक्कालिगा, अनुसूचित जाति और अन्य प्रभावशाली समुदायों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में कई उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलें भी तेज हैं। हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट किया है कि पार्टी के पास अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा।

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न गुटों और नेताओं के बीच संतुलन बनाए रखना है। पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने राज्य में मजबूत जनाधार तैयार किया है और अब सरकार गठन के दौरान किसी भी वर्ग या नेता की नाराजगी से बचना चाहती है। इसी वजह से हर फैसले पर गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद नई सरकार की रूपरेखा काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी। मंत्रिमंडल गठन को लेकर हाईकमान का फैसला न केवल सरकार की दिशा तय करेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति को भी प्रभावित करेगा।

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