बढ़ती शिक्षा लागत पर अंकुश: सरकार ने पेश किया स्कूल फीस नियंत्रण बिल
तमिलनाडु सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की बढ़ती फीस को नियंत्रित करने के लिए नया बिल पेश किया है। इस बिल का उद्देश्य माता-पिता को आर्थिक राहत देना और शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। हाल के वर्षों में निजी स्कूलों की फीस में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे कई परिवारों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया था।
बिल के तहत अब स्कूलों को हर साल फीस बढ़ोतरी का स्पष्ट कारण बताना होगा। फीस में किसी भी तरह की असंगत वृद्धि को रोकने के लिए स्कूल प्रशासन को राज्य शिक्षा बोर्ड के सामने अनुमोदन कराना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, बिल में यह भी प्रावधान है कि स्कूल किसी भी अतिरिक्त शुल्क या अनपेक्षित खर्च के लिए माता-पिता से अलग से वसूली नहीं कर सकते।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न केवल आर्थिक बोझ को कम करेगा, बल्कि स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में भी मदद करेगा। साथ ही, यह सुनिश्चित करेगा कि बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता पर किसी भी तरह का नकारात्मक असर न पड़े।
बिल में शिकायत निवारण प्रणाली को भी शामिल किया गया है। माता-पिता अब राज्य शिक्षा विभाग के पास शिकायत दर्ज कर सकते हैं यदि उन्हें लगता है कि स्कूल ने बिल में उल्लिखित नियमों का पालन नहीं किया। विभाग को इस शिकायत का समय पर निवारण करना अनिवार्य होगा।
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि शिक्षा एक बुनियादी अधिकार है और उसे केवल आमदनी का साधन नहीं बनने दिया जाएगा। बिल पारित होने के बाद स्कूलों की फीस बढ़ोतरी पर नियंत्रण के साथ-साथ माता-पिता और विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बिल को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो यह पूरे राज्य में निजी शिक्षा प्रणाली को संतुलित करने में मदद करेगा और अधिक पारदर्शी शिक्षा वातावरण तैयार करेगा।












