वर्क परमिट रद्द करने की मांग, भारतीयों के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्र संगठन
बांग्लादेश में भारतीय नागरिकों को लेकर एक नई बगावत के संकेत सामने आए हैं। देश के एक प्रभावशाली छात्र संगठन ने भारत से आए लोगों के वर्क परमिट रद्द करने की मांग उठाई है। इस मांग के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
छात्र संगठन का आरोप है कि बांग्लादेश में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम कर रहे हैं, जिससे स्थानीय युवाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। संगठन के नेताओं का कहना है कि विदेशी कामगारों को प्राथमिकता देने की नीति पर सरकार को दोबारा विचार करना चाहिए और सबसे पहले देश के नागरिकों को रोजगार मिलना चाहिए।
इस मुद्दे पर राजधानी ढाका समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से स्पष्ट नीति बनाने और भारतीय नागरिकों को दिए गए वर्क परमिट की समीक्षा करने की मांग की है। कुछ जगहों पर भारत विरोधी नारे भी लगाए गए, जिससे माहौल और संवेदनशील हो गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विरोध सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे आंतरिक राजनीति और असंतोष भी एक बड़ा कारण हो सकता है। बांग्लादेश में हाल के महीनों में आर्थिक दबाव, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर युवाओं में नाराजगी बढ़ी है, जिसका असर अब विदेशी नागरिकों के खिलाफ विरोध के रूप में सामने आ रहा है।
हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों को इस संवेदनशील मुद्दे को बातचीत और संतुलन के साथ सुलझाना होगा, ताकि द्विपक्षीय रिश्तों पर नकारात्मक असर न पड़े।












