पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) तेज़ी से चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि राज्यभर में वोटरों से जुड़े दस्तावेज़ों और फॉर्म का डिजिटाइजेशन लगातार जारी है। अभी तक पूरे अभियान में 78% फॉर्म का डिजिटाइजेशन पूरा किया जा चुका है, जबकि लगभग 22% काम अभी भी बाकी है, जिसे जल्द पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
28 लाख नाम काटे गए – क्यों?
पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान अब तक 28 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:
9 लाख वोटर ऐसे हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन उनके नाम अब तक सूची में अपडेट नहीं हुए थे।
बाकी बचे करीब 19 लाख लोग या तो अपने पते से लापता पाए गए, या उनके दस्तावेज़ अधूरे थे, या वे लंबे समय से ट्रेस नहीं हुए—ऐसे में नियमों के तहत उनके नाम सूची से हटाए गए हैं।
क्यों ज़रूरी है यह प्रक्रिया?
चुनाव आयोग का कहना है कि यह कदम मतदाता सूची को सटीक, साफ और विश्वसनीय बनाने के लिए ज़रूरी है।
फर्जी वोटिंग पर रोक, मृत मतदाताओं का नाम हटाना, और लापता/स्थानांतरित लोगों के रिकॉर्ड को अपडेट करना—ये सभी प्रयास चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे हैं।
आगे क्या?
अधिकारियों के अनुसार शेष 22% डिजिटाइजेशन पूरा होने के बाद मतदाता सूची का एक नया, अपडेटेड और साफ डेटा तैयार होगा, जिसे आगामी चुनावों से पहले प्रकाशित किया जाएगा।












