भारत 85वें स्थान पर, अमेरिका 12वें नंबर पर पहुँचा पासपोर्ट इंडेक्स में
नए साल से पहले पासपोर्ट की ताकत के वैश्विक इंडेक्स में भारत का स्थान कमजोर होकर 85वें नंबर पर पहुंच गया है। यह जानकारी Henley Passport Index और अन्य वैश्विक रिपोर्ट्स के आधार पर सामने आई है। भारत ने पिछले सालों की तुलना में इस बार रैंकिंग में गिरावट दर्ज की है, जो अंतरराष्ट्रीय यात्रा और वीज़ा सुविधाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट धारक अब केवल सीमित देशों में बिना वीज़ा यात्रा कर सकते हैं। इस इंडेक्स में देशों की रैंक उनके नागरिकों को कितने देशों में बिना वीज़ा या वीज़ा ऑन अराइवल की सुविधा मिलती है, इसके आधार पर तय होती है। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर वीज़ा नियम और सुरक्षा प्रोटोकॉल में कड़ाई के कारण भारत का रैंक प्रभावित हुआ है।
इस सूची में अमेरिका ने 12वें स्थान पर जगह बनाई है। अमेरिकी पासपोर्ट धारक दुनिया के कई देशों में बिना वीज़ा या वीज़ा ऑन अराइवल के यात्रा कर सकते हैं। जापान, सिंगापुर और जर्मनी जैसे देशों के पासपोर्ट को अभी भी सबसे शक्तिशाली माना जाता है, क्योंकि उनके नागरिक लगभग 190 देशों में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पासपोर्ट की रैंकिंग सिर्फ यात्रा की स्वतंत्रता को नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों, सुरक्षा समझौतों और कूटनीतिक प्रभाव को भी दर्शाती है। भारत के लिए यह चुनौती यह है कि विदेश नीति और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से देश के नागरिकों के लिए यात्रा को और आसान बनाया जाए।
हालांकि भारतीय पासपोर्ट की रैंक में गिरावट हुई है, फिर भी दुनिया भर में भारतीय नागरिक की संख्या और यात्रा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। सरकार लगातार वीज़ा सुधार और द्विपक्षीय समझौतों पर काम कर रही है, जिससे भविष्य में स्थिति बेहतर हो सकती है।












