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नए मुख्य न्यायाधीश ने कार्यभार संभालते ही किए महत्वपूर्ण बदलाव

Chief Justice of India

देश के नए मुख्य न्यायाधीश ने पदभार संभालते ही न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तत्काल सुधारों की शुरुआत कर दी। अपने पहले ही कार्यदिवस पर उन्होंने सत्रह महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की, जिससे यह संकेत मिला कि वह न्यायिक कार्यों में तेजी और जिम्मेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।

पहले ही दिन उन्होंने एक अहम निर्णय लेते हुए मौखिक मेंशनिंग की पुरानी प्रथा को समाप्त कर दिया। सामान्यतः वकील अदालत की शुरुआत में ही मौखिक रूप से अपने तात्कालिक मामलों का उल्लेख करते थे, जिससे कई बार समय की बर्बादी और कार्यवाही में अव्यवस्था पैदा होती थी। नई व्यवस्था के तहत अब वकीलों को तात्कालिक मामलों के लिए लिखित आवेदन देना होगा, जिसमें आपात स्थिति का स्पष्ट उल्लेख होगा। इससे मामलों को प्राथमिकता देने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल बनेगी।

मुख्य न्यायाधीश का स्पष्ट कहना है कि न्यायिक व्यवस्था को अनावश्यक रूप से बाधित नहीं होना चाहिए। लिखित प्रणाली लागू होने से अदालत का समय बचेगा, कार्यभार का बेहतर प्रबंधन होगा और सभी पक्षों को समान अवसर मिल सकेगा। यह तरीका कई विकसित देशों में अपनाई जाने वाली न्यायिक प्रक्रियाओं से मेल खाता है, जहां दस्तावेज़ आधारित कार्यवाही को महत्व दिया जाता है।

पहले दिन विभिन्न मामलों की सुनवाई के दौरान CJI ने इस बात पर जोर दिया कि न्यायिक प्रणाली का मूल उद्देश्य जनता को समयबद्ध और भरोसेमंद न्याय प्रदान करना है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि जहां भी जरूरत होगी, बदलाव तुरंत लागू किए जाएंगे ताकि अदालत की कार्यक्षमता बढ़ सके।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अदालतों की कार्यशैली को अधिक व्यवस्थित बनाएगा और अनिश्चितता कम करेगा। इस शुरुआती सुधार से साफ है कि नए मुख्य न्यायाधीश न्यायिक प्रशासन को अधिक आधुनिक और अनुशासित दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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