सागर, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के सागर जिले में 50 वर्षीय महिला की हत्या के मामले में उसके बेटे को सत्र न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस अपराध को जघन्यतम करार दिया। मामले में पुलिस द्वारा जुटाए गए डीएनए, अंगुलियों के निशान और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्य महत्वपूर्ण साबित हुए।
अभियोजन के अनुसार, घटना 19 जुलाई 2025 की है। सीताराम लोधी अपनी बेटी को लेने छतरपुर गए थे। उस समय घर में उनकी पत्नी और बेटा संतोष लोधी मौजूद थे। अगले दिन 20 जुलाई को जब सीताराम घर लौटे तो उनकी पत्नी का लहूलुहान शव आंगन में पड़ा मिला। वहीं उनका बेटा संतोष घर से गायब था।
पुलिस जांच में सामने आया कि संतोष ने घर में अकेली मां के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया था। आरोप है कि मां ने इसका विरोध किया, जिसके बाद संतोष ने पत्थर से हमला कर उनकी हत्या कर दी।
जांच के दौरान घटनास्थल से अंगुलियों के निशान और मृतका के शरीर से जैविक नमूने जुटाए गए। पुलिस के अनुसार, इन नमूनों की जांच में संतोष का डीएनए मैच हुआ। इन फॉरेंसिक साक्ष्यों को अभियोजन ने अदालत के समक्ष महत्वपूर्ण आधार के रूप में पेश किया।
मामले की सुनवाई के दौरान मृतका के पति सीताराम लोधी अपने बयान से मुकर गए थे। इसके बावजूद अदालत ने उपलब्ध वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर संतोष को दोषी माना।
पुलिस ने मामले में करीब 150 पन्नों की चार्जशीट तैयार की थी और 18 नवंबर 2025 को न्यायालय में चालान पेश किया था। मुकदमे के दौरान सीताराम लोधी समेत 25 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
बंडा के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएल शाक्य ने बुधवार को मामले में फैसला सुनाते हुए संतोष लोधी को फांसी की सजा दी।











