नई दिल्ली: नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में देश के बुनियादी उद्योगों की विकास रफ्तार उम्मीद से धीमी रही है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में आठ प्रमुख कोर सेक्टरों की वृद्धि दर 1.7 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि यह मार्च 2026 के संशोधित 1.2 प्रतिशत के मुकाबले कुछ बेहतर है, लेकिन पिछले वर्षों की तुलना में इसे धीमी वृद्धि माना जा रहा है। इस दौरान सीमेंट, स्टील और बिजली क्षेत्रों ने औद्योगिक गतिविधियों को सहारा दिया, जबकि पांच अहम सेक्टरों में गिरावट ने कुल विकास दर पर दबाव बनाए रखा।
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में सीमेंट उत्पादन में सबसे अधिक 9.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि देशभर में जारी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और निर्माण गतिविधियों की वजह से इस क्षेत्र को मजबूती मिली है। इसके अलावा स्टील उत्पादन में 6.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो औद्योगिक और निर्माण मांग में सुधार का संकेत देती है। बिजली उत्पादन भी 4.1 प्रतिशत बढ़ा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आर्थिक गतिविधियों में निरंतरता बनी हुई है।
दूसरी ओर, ऊर्जा और ईंधन से जुड़े क्षेत्रों का प्रदर्शन चिंता बढ़ाने वाला रहा। अप्रैल में कोयला उत्पादन में 8.7 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जबकि उर्वरक उत्पादन 8.6 प्रतिशत घट गया। प्राकृतिक गैस उत्पादन में 4.3 प्रतिशत और कच्चे तेल के उत्पादन में 3.9 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वहीं पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों का उत्पादन भी 0.5 प्रतिशत घटा। इन क्षेत्रों में कमजोरी का असर सीधे औद्योगिक उत्पादन और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी इस सुस्ती की एक बड़ी वजह हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता का असर भारतीय उद्योगों पर दिखाई देने लगा है। इक्रा लिमिटेड के वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि अनुकूल बेस इफेक्ट के बावजूद कोर सेक्टर की वृद्धि उम्मीद से कमजोर रही है। उनका कहना है कि आठ में से पांच क्षेत्रों में गिरावट यह दर्शाती है कि वैश्विक संकट का असर घरेलू औद्योगिक गतिविधियों पर पड़ रहा है।
राहुल अग्रवाल के अनुसार, अप्रैल की 1.7 प्रतिशत वृद्धि मुख्य रूप से बिजली और सीमेंट सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन की वजह से संभव हो पाई। उन्होंने आशंका जताई कि कोर सेक्टर की यह सुस्ती अप्रैल 2026 के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) पर भी असर डाल सकती है। जल्द ही नए आधार वर्ष के साथ जारी होने वाले आईआईपी आंकड़ों पर बाजार और उद्योग जगत की नजर रहेगी।
गौरतलब है कि ये आठ प्रमुख उद्योग देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 40.27 प्रतिशत का योगदान देते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों का प्रदर्शन देश की औद्योगिक और आर्थिक सेहत का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से मार्च तक कोर सेक्टर की संचयी वृद्धि दर 2.7 प्रतिशत रही है।
कुल मिलाकर, अप्रैल 2026 के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल मिश्रित परिस्थितियों से गुजर रही है। जहां निर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र मजबूती दिखा रहे हैं, वहीं ऊर्जा और ईंधन क्षेत्रों में गिरावट आने वाले महीनों में सरकार और नीति निर्माताओं के लिए चुनौती बन सकती है।










