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NIA Action: पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाला आरोपी कोलकाता से गिरफ्तार, सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप

नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भारत विरोधी आतंकी साजिश और जासूसी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कोलकाता निवासी जफर रियाज उर्फ रिजवी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी पाकिस्तान के खुफिया अधिकारियों (PIO) को भारत की गोपनीय सुरक्षा संबंधी जानकारी पहुंचाने में शामिल था। इस गिरफ्तारी को देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक अहम सफलता माना जा रहा है।

एनआईए के अनुसार, आरोपी के खिलाफ पहले से ही लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था और उसे ‘प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर’ घोषित करने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान एजेंसी ने उसे हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम [UAPA] की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

जांच में सामने आया है कि जफर रियाज की शादी एक पाकिस्तानी नागरिक से हुई थी और उसके बच्चे भी पाकिस्तानी नागरिक हैं। एनआईए का दावा है कि वह लंबे समय से पाकिस्तान के संपर्क में था और भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

एजेंसी के मुताबिक, जफर इससे पहले भी जासूसी के एक मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत कार्रवाई हुई थी। एनआईए की आरसी-12/2025/एनआईए/डीएलआई मामले की जांच में यह खुलासा हुआ कि आरोपी वर्ष 2005 से लगातार भारत और पाकिस्तान के बीच यात्रा कर रहा था।

जांच एजेंसी का कहना है कि पाकिस्तान की यात्रा के दौरान ही पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों ने उसे अपने संपर्क में लिया। आरोपी को आर्थिक लाभ और पाकिस्तानी नागरिकता का लालच देकर भारत में जासूसी गतिविधियां संचालित करने के लिए तैयार किया गया था।

एनआईए ने खुलासा किया कि आरोपी ने पाकिस्तान स्थित एजेंटों की मदद के लिए भारतीय मोबाइल नंबरों के वन-टाइम पासवर्ड (OTP) साझा किए थे। इन ओटीपी की मदद से पाकिस्तान में कई व्हाट्सएप अकाउंट सक्रिय किए गए। एजेंसी के अनुसार, इन खातों का इस्तेमाल भारत में मौजूद अन्य संदिग्धों और जासूसी नेटवर्क से जुड़े लोगों के साथ गुप्त बातचीत के लिए किया जा रहा था।

जांच में यह भी सामने आया है कि कथित पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी इन व्हाट्सएप अकाउंट्स के जरिए मोतीराम जाट नामक आरोपी से संपर्क में थे। मोतीराम जाट पर सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील और गोपनीय जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचाने का आरोप है। एनआईए अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और इसके पीछे की बड़ी साजिश का पता लगाने में जुटी हुई है।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ जासूसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार आतंकी गतिविधियों और सीमा पार संचालित नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। एनआईए फिलहाल आरोपी से पूछताछ कर रही है और डिजिटल उपकरणों समेत कई अहम सबूतों की जांच की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते सुरक्षा तनाव के बीच इस तरह के मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में इस जांच में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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