नई दिल्ली: भारत में मानसून की शुरुआत से पहले मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है। प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे अल-नीनो के कारण इस वर्ष मानसून पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने कहा है कि जून से अगस्त के बीच अल-नीनो बनने की संभावना 80 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
अल-नीनो एक ऐसी जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के जल का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ता है। भारत में यह अक्सर कमजोर मानसून और अधिक गर्मी से जुड़ा माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि अल-नीनो मजबूत होता है तो कई राज्यों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की जा सकती है। इससे कृषि क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। देश में खरीफ फसलों की बुवाई मानसून पर निर्भर करती है और बारिश में कमी उत्पादन पर असर डाल सकती है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही जून में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना जताई है। इसके कारण बिजली की मांग, पानी की खपत और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
WMO का कहना है कि अल-नीनो नवंबर तक बना रह सकता है। इसका मतलब है कि पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
स्थिति को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में किसानों के लिए वैकल्पिक योजनाओं पर चर्चा की गई। इसमें सूखा-रोधी बीजों का उपयोग, जल संरक्षण और मौसम आधारित कृषि सलाह को प्राथमिकता देने की बात कही गई।











