कोलकाता, 23 जून। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सियासी घमासान के बीच पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बड़ा कदम उठाया है। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास और छह अन्य नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब टीएमसी के भीतर बगावत खुलकर सामने आ चुकी है।
जानकारी के अनुसार, निष्कासित नेताओं पर पार्टी लाइन से अलग गतिविधियों में शामिल होने और संगठन के खिलाफ काम करने के आरोप लगाए गए हैं। हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर एक बागी गुट सक्रिय हुआ है, जिसने पार्टी नेतृत्व को खुली चुनौती दी है।
राजनीतिक घटनाक्रम तब और तेज हो गया जब बागी खेमे ने ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने का दावा किया और अपनी अलग संगठनात्मक संरचना की घोषणा कर दी। बागी गुट ने वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को अपने गुट का अध्यक्ष भी घोषित किया था।
इसके जवाब में ममता बनर्जी खेमे ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए संबंधित नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। माना जा रहा है कि यह कदम संगठन पर अपनी पकड़ मजबूत करने और बागी नेताओं को स्पष्ट संदेश देने के लिए उठाया गया है।
पार्टी के भीतर यह संकट पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद और गहरा गया है। कई वरिष्ठ नेता नेतृत्व को लेकर असंतोष जता चुके हैं और संगठनात्मक बदलाव की मांग कर रहे हैं। ऐसे में यह निष्कासन टीएमसी की आंतरिक राजनीति में एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद चुनाव आयोग और विधानसभा की राजनीति तक पहुंच सकता है। फिलहाल ममता बनर्जी ने सख्त कार्रवाई कर यह संकेत दे दिया है कि पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।












