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महरंग बलोच को उम्रकैद के बाद पाकिस्तान पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव, ट्रंप से हस्तक्षेप की मांग

पाकिस्तान में बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता और बलोच यकजहती कमेटी (बीवाईसी) की प्रमुख नेता डॉ. महरंग बलोच को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद गहरा गया है। इस फैसले को लेकर मानवाधिकार संगठनों, बलोच समुदाय के नेताओं और कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चिंता व्यक्त की जा रही है। बलोच कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पाकिस्तान में शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों और मानवाधिकारों की आवाज उठाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है।

पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधी अदालत ने सोमवार को डॉ. महरंग बलोच समेत चार कार्यकर्ताओं को फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले के बाद बलोच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक विस्तृत पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।

अपने पत्र में तारा चंद ने कहा कि महरंग बलोच ने अपना जीवन बलोचिस्तान में जबरन गायब किए गए लोगों, हिरासत में मौतों और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष को समर्पित किया है। उन्होंने लिखा कि एक वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद महरंग बलोच को उम्रकैद की सजा दिया जाना न्यायिक प्रक्रिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

तारा चंद ने बलोचिस्तान की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के बावजूद बलोचिस्तान के लोग गरीबी, राजनीतिक उपेक्षा और मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना कर रहे हैं। उनका दावा है कि हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि आवाज उठाने वालों को धमकियां और जेल का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने अमेरिकी प्रशासन से अपील की कि वह महरंग बलोच के मामले पर करीबी नजर रखे, उनकी कानूनी अपील के अधिकार का समर्थन करे और पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का पालन करने के लिए प्रेरित करे।

इस बीच कई प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने भी अदालत के फैसले की आलोचना की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की दक्षिण एशिया के लिए कार्यवाहक क्षेत्रीय निदेशक इसाबेल लासे ने कहा कि यह फैसला निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल असहमति की आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार महरंग बलोच और अन्य कार्यकर्ताओं को कथित हिंसक गतिविधियों से जोड़ने वाले पर्याप्त सबूत सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन (आईएचआरएफ) ने भी फैसले को न्याय का दुरुपयोग बताया है। संगठन ने कहा कि यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के राजनीतिक इस्तेमाल और मानवाधिकार रक्षकों को डराने-धमकाने की कोशिश का उदाहरण है।

महरंग बलोच के मामले ने एक बार फिर पाकिस्तान में मानवाधिकारों, न्यायिक स्वतंत्रता और बलोचिस्तान की स्थिति को वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और पाकिस्तान पर बढ़ते दबाव पर सबकी नजर रहेगी।

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