मध्य प्रदेश में जमीन खरीद से जुड़े विवाद में मुख्यमंत्री मोहन यादव का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव का बचाव किए जाने पर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओपी राजभर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अखिलेश यादव पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
ओपी राजभर ने अपने पोस्ट में कहा कि आखिर अखिलेश यादव मुख्यमंत्री मोहन यादव के मामले को लेकर इतना शोर क्यों मचा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस विवाद के जरिए कोई बड़ी सच्चाई छिपाने की कोशिश की जा रही है। राजभर ने दावा किया कि अखिलेश यादव की बेचैनी के पीछे मध्य प्रदेश में हुए कथित निवेश और जमीन सौदों का मामला हो सकता है।
राजभर ने अपने बयान में मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी भरत यादव का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भरत यादव और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे चंद्रपाल यादव के बीच पारिवारिक संबंध हैं। राजभर का दावा है कि सड़क विकास परियोजनाओं और हाईवे रूट से जुड़ी जानकारियों का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने जमीनों में निवेश किया हो सकता है।
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि इस पूरे मामले में कुछ ऐसे निवेश जुड़े हो सकते हैं जिनके प्रभावित होने का डर सपा नेतृत्व को सता रहा है। हालांकि राजभर ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया।
ओपी राजभर ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे परियोजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान एक्सप्रेसवे के रूट में बदलाव कर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाया गया था। उन्होंने दावा किया कि रूट को सैफई क्षेत्र की ओर मोड़ने से परियोजना की लंबाई बढ़ी और जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामलों में लाभ कमाया गया।
अपने बयान के अंत में राजभर ने जांच एजेंसियों से मांग की कि मध्य प्रदेश में हुए कथित निवेश और जमीन खरीद मामलों की जांच की जाए। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि उत्तर प्रदेश के किन प्रभावशाली लोगों ने वहां निवेश किया है।
राजभर के इन आरोपों के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। अब सभी की नजर समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया और इस मामले में आगे होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर है।











