दिल्ली पुलिस ने नवजात बच्चों की तस्करी से जुड़े एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी संतान की चाह रखने वाले दंपतियों को आईवीएफ और सरोगेसी का झांसा देकर लाखों रुपये वसूलते थे और बाद में खरीदे गए बच्चों को उनका जैविक बच्चा बताकर सौंप देते थे।
पुलिस के अनुसार, गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित थी। जिन दंपतियों को संतान नहीं हो रही थी, उन्हें आधुनिक चिकित्सा तकनीक और किराए की कोख के जरिए बच्चा होने का भरोसा दिलाया जाता था। इसके बाद करीब नौ महीने तक इलाज, जांच और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर उनसे भारी रकम वसूली जाती थी। अंत में किसी गरीब परिवार से खरीदे गए नवजात को उनका बच्चा बताकर सौंप दिया जाता था।
इस मामले में हाल ही में ऋषिकेश से एक 32 वर्षीय महिला को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में महिला ने बताया कि उसकी शादी को 12 साल हो चुके थे और उसके पति को लकवा हो गया था। परिवार की इच्छा पर वह एक डॉक्टर के संपर्क में आई, जिसने आईवीएफ तकनीक के जरिए बच्चा होने का आश्वासन दिया। महिला और उसके पति को कई महीनों तक यह विश्वास दिलाया गया कि उनकी संतान सरोगेसी के माध्यम से जन्म ले रही है।
महिला ने बताया कि लगभग नौ महीने तक इलाज और नियमित जांच के नाम पर अस्पताल बुलाया जाता रहा। बाद में जून में कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाकर उसे एक नवजात बच्चा सौंप दिया गया। उसे बताया गया कि यह उसका अपना बच्चा है। पुलिस जांच में सामने आया कि वह बच्चा वास्तव में खरीदा गया था और महिला इस पूरे फर्जीवाड़े से अनजान थी।
इससे पहले पुलिस ने रोहिणी में छापेमारी कर एक दंपति और उनके परिवार के सदस्य को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उन्होंने करीब 9.30 लाख रुपये देकर नवजात बच्चा हासिल किया था। पुलिस ने उनके पास से भी एक बच्चा बरामद किया।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अब तक इस मामले में सात बच्चों को सुरक्षित बरामद किया जा चुका है और कुल 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में अस्पताल संचालक, बिचौलिए और अन्य सहयोगी शामिल हैं। जांच में पता चला है कि गिरोह पिछले डेढ़ वर्ष में लगभग 30 बच्चों की खरीद-फरोख्त कर चुका है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों के गरीब परिवारों को आर्थिक मदद का लालच देकर उनके नवजात बच्चों को 10 से 15 हजार रुपये में खरीद लेते थे। बाद में इन्हीं बच्चों को संतान की चाह रखने वाले दंपतियों को 5 से 10 लाख रुपये तक में बेच दिया जाता था। गिरोह का नेटवर्क दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश तक फैला हुआ बताया जा रहा है।
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और अन्य बच्चों तथा आरोपियों की तलाश जारी है। यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं और सरोगेसी के नाम पर किए जा रहे बड़े फर्जीवाड़े की गंभीर तस्वीर सामने लाता है।











