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IAS तुकाराम मुंढे के तबादले पर महाराष्ट्र की राजनीति गरम, ड्रग माफिया से जुड़े गंभीर आरोपों ने बढ़ाई हलचल

मुंबई, महाराष्ट्र

महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आयुक्त और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह उनके संभावित तबादले को लेकर विधानसभा में उठे गंभीर आरोप हैं। विपक्षी नेताओं ने दावा किया है कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफिया और कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूह उनके खिलाफ सक्रिय हैं। हालांकि राज्य सरकार ने ऐसे सभी दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि मुंढे के तबादले का कोई प्रस्ताव नहीं है।

विधानसभा में एनसीपी (शरद पवार) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने आरोप लगाया कि एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग लॉबी ने तुकाराम मुंढे का तबादला कराने के लिए 250 करोड़ रुपये जुटाए हैं। उन्होंने कहा कि खाद्य एवं दवा क्षेत्र से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोग और भ्रष्ट अधिकारी मुंढे की सख्त कार्रवाई से परेशान हैं। आव्हाड ने यह भी दावा किया कि वह जल्द ही इस कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों के नाम सार्वजनिक करेंगे।

इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के भीतर भी मुंढे के समर्थन की आवाज सुनाई दी। भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे ईमानदार अधिकारी को कम से कम तीन वर्ष तक एक ही पद पर काम करने का अवसर मिलना चाहिए। वहीं शिवसेना विधायक अर्जुन खोतकर ने दावा किया कि मुंढे को जान से मारने की धमकियां मिली हैं और उनकी सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि जिरवाल ने विधानसभा में कहा कि तुकाराम मुंढे का तबादला करने का कोई सवाल नहीं उठता। उन्होंने स्वीकार किया कि विभाग संसाधनों की कमी से जूझ रहा है, लेकिन मुंढे के नेतृत्व में कार्रवाई प्रभावी ढंग से जारी है।

2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे अपने सख्त और निष्पक्ष प्रशासनिक रवैये के लिए जाने जाते हैं। एक छोटे किसान परिवार से आने वाले मुंढे ने यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल कर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया था। पिछले दो दशकों में उनका 24 से अधिक बार तबादला हो चुका है, जिसे उनके कड़े प्रशासनिक फैसलों से जोड़कर देखा जाता है।

एफडीए कमिश्नर बनने के बाद उन्होंने पूरे महाराष्ट्र में मिलावटी खाद्य पदार्थों, प्रतिबंधित गुटखा, नकली दवाओं और अवैध कारोबार के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया। विभाग ने 900 से अधिक छापेमारी कर करोड़ों रुपये का प्रतिबंधित सामान जब्त किया, सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया और कई प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की। इसके अलावा अस्पतालों और होटल-रेस्तरां को उपभोक्ताओं के अधिकारों का पालन करने के निर्देश भी जारी किए गए।

मुंढे की कार्यशैली को लेकर जनता के बीच भी व्यापक समर्थन देखने को मिला है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने उन्हें पद पर बनाए रखने की मांग करते हुए प्रदर्शन किए हैं। फिलहाल विधानसभा में उठे आरोपों ने इस पूरे मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना दिया है।

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