चीन लगातार अपने परमाणु हथियारों के भंडार का विस्तार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (SIPRI) की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 तक चीन के पास लगभग 620 परमाणु वॉरहेड मौजूद थे। पिछले वर्ष यह संख्या 600 थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने 2023 से 2025 के बीच हर साल अपने परमाणु भंडार में करीब 100 नए वॉरहेड जोड़े। हालांकि हालिया अवधि में इस वृद्धि की रफ्तार कुछ कम हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अपनी ‘सेकेंड स्ट्राइक’ यानी जवाबी परमाणु हमले की क्षमता को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
हालांकि चीन अब भी अपनी परमाणु नीति को ‘नो फर्स्ट यूज’ सिद्धांत पर आधारित बताता है। इस नीति के तहत चीन का कहना है कि वह किसी भी संघर्ष में पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करेगा और उसका परमाणु कार्यक्रम केवल आत्मरक्षा के उद्देश्य से है।
अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2030 तक चीन के पास करीब 1,000 परमाणु वॉरहेड हो सकते हैं। इसके बावजूद यह संख्या अमेरिका और रूस के परमाणु भंडार की तुलना में काफी कम होगी।
हाल के वर्षों में चीन ने अपनी परमाणु क्षमता का सार्वजनिक प्रदर्शन भी किया है। वर्ष 2024 में उसने बिना परमाणु हथियार वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का परीक्षण किया, जबकि 2025 में आयोजित सैन्य परेड में पहली बार अपने ‘न्यूक्लियर ट्रायड’—यानी जमीन, समुद्र और हवा से परमाणु हमला करने की क्षमता—का प्रदर्शन किया।











