श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल के विस्तार और संभावित फेरबदल को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में सार्वजनिक रूप से कैबिनेट विस्तार के संकेत दिए जाने के बाद सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के भीतर मंत्री पद की दौड़ तेज हो गई है। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि विधानसभा के मानसून सत्र से पहले या उसके दौरान मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है।
अक्टूबर 2024 में सरकार बनने के बाद यह पहला अवसर होगा जब मंत्रिमंडल के विस्तार पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित कुल छह मंत्री कार्यरत हैं, जबकि नियमों के अनुसार तीन कैबिनेट पद अभी भी रिक्त हैं। यदि मौजूदा मंत्रियों में कोई बदलाव नहीं किया जाता है, तो इन रिक्त पदों पर नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। हालांकि राजनीतिक हलकों में फेरबदल की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कई वरिष्ठ, अनुभवी और युवा विधायक मंत्री पद के लिए सक्रिय रूप से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। सरकार को समर्थन देने वाले कुछ निर्दलीय विधायक भी मंत्रिमंडल में स्थान मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। मुख्यमंत्री के सामने क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और पार्टी के भीतर राजनीतिक समीकरणों को साधने की बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
इस बार के विस्तार में शिया समुदाय को प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना भी प्रबल बताई जा रही है। वर्तमान मंत्रिमंडल में कोई शिया मंत्री नहीं होने के कारण इस समुदाय से एक चेहरे को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे सामाजिक संतुलन मजबूत करने के साथ-साथ पार्टी को राजनीतिक लाभ भी मिल सकता है।
दूसरी ओर सहयोगी दल कांग्रेस का रुख भी इस विस्तार में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाता, तब तक वह सरकार में शामिल नहीं होगी। यदि पार्टी अपने इस फैसले पर कायम रहती है तो रिक्त पदों पर केवल नेशनल कॉन्फ्रेंस या सरकार को समर्थन देने वाले विधायकों को अवसर मिलने की संभावना है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को विस्तार के दौरान जम्मू और कश्मीर दोनों क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व, विभिन्न समुदायों की भागीदारी, वरिष्ठ नेताओं की अपेक्षाएं और भविष्य की राजनीतिक रणनीति जैसे कई पहलुओं के बीच संतुलन बनाना होगा। हालांकि अब तक मुख्यमंत्री कार्यालय या सरकार की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख अथवा संभावित नए मंत्रियों के नामों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल राज्य की राजनीति में संभावित कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं लगातार तेज बनी हुई हैं।











