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NATO समिट में ट्रंप के तीखे तेवर, मेलोनी की तारीफ के साथ ईरान मुद्दे पर साधा निशाना; ग्रीनलैंड पर भी दोहराया दावा

अंकारा, तुर्किये।
तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने एक ओर मेलोनी को “अच्छा व्यक्ति” और सक्षम नेता बताया, वहीं दूसरी ओर ईरान से जुड़े सैन्य अभियान में अमेरिका का साथ नहीं देने के फैसले को उनकी “गलती” करार दिया। ट्रंप की इस टिप्पणी को दोनों नेताओं के बीच बढ़ते राजनीतिक मतभेदों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “मेरा उनके साथ संबंध थोड़ा खराब हो गया है, क्योंकि उन्होंने हमारी मदद करने से इनकार कर दिया था। लेकिन मैं उन्हें पसंद करता हूं। मुझे लगता है कि वह वास्तव में एक अच्छी व्यक्ति हैं, लेकिन उन्होंने एक गलती की।” ट्रंप के इस बयान ने नाटो सम्मेलन की राजनीतिक चर्चाओं को नई दिशा दे दी।

जॉर्जिया मेलोनी को लंबे समय तक ट्रंप का करीबी यूरोपीय सहयोगी माना जाता रहा है। दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रवाद, सीमा सुरक्षा, आव्रजन और आर्थिक नीतियों जैसे कई मुद्दों पर समान सोच देखने को मिली थी। हालांकि हाल के महीनों में ईरान से जुड़े घटनाक्रम और मध्य पूर्व की सुरक्षा रणनीति को लेकर दोनों देशों के दृष्टिकोण में अंतर सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की टिप्पणी इसी बदलते राजनीतिक समीकरण को दर्शाती है।

नाटो सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर भी अपना पुराना रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि आर्कटिक क्षेत्र की बढ़ती सामरिक अहमियत को देखते हुए ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि उन्होंने इस संबंध में किसी नई नीति या आधिकारिक प्रस्ताव की घोषणा नहीं की।

इसके अलावा ट्रंप ने अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में वायरल हुए हिजाब वीडियो पर भी प्रतिक्रिया दी। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस शुरू हो गई। हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से इस मुद्दे पर कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया।

इस बार का नाटो शिखर सम्मेलन रक्षा बजट बढ़ाने, रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व की स्थिति, साइबर सुरक्षा और सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत बनाने जैसे अहम मुद्दों पर केंद्रित है। सम्मेलन में कई देशों ने रक्षा निवेश बढ़ाने और आधुनिक सैन्य तकनीकों को अपनाने की प्रतिबद्धता भी जताई है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ट्रंप के हालिया बयान केवल व्यक्तिगत संबंधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे नाटो के भीतर विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति को लेकर उभर रहे मतभेदों की भी झलक दिखाते हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका और इटली के बीच कूटनीतिक संवाद तथा नाटो की सामूहिक रणनीति पर इन बयानों का असर देखने को मिल सकता है।

 

 

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